ऐसे तो गायब हो जाएंगी झारखंड की नदियां, जलधाराएं हो रहीं विलुप्त; गढ़वा की जीवनरेखा पर संकट
गढ़वा जिले की जीवन रेखा मानी जाने वाली दानरो नदी और इसकी छोटी-छोटी जलधाराएं तेजी से विलुप्त हो रही हैं।
ताजा वैज्ञानिक शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पिछले 45 वर्षों में नदी तंत्र की करीब 69 प्रतिशत धाराएं, उनकी लंबाई और जल निकासी क्षमता में जबरदस्त कमी दर्ज की गई।
यह महत्वपूर्ण शोध दानरो नदी पर पीएचडी कर रहे शोधार्थी राहुल कुमार पांडेय, पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. अंशुमाली तथा शोध पर्यवेक्षक डॉ. अभय कृष्ण सिंह की ओर से भूगोल विभाग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन गढ़वा जिले के जल संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए उपयोगी दिशा प्रदान करता है तथा स्थानीय प्रशासन व समुदायों को समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देता है।
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि यही सिलसिला चला तो जल संकट, भूजल स्तर में भारी गिरावट और सूखे की मार और विकराल हो जाएगी।
दानरो वाटरशेड, गढ़वा की जलापूर्ति का मजबूत किला
छोटानागपुर पठार पर बसा दानरो नदी वाटरशेड गढ़वा के लिए बेहद अहम जलग्रहण क्षेत्र है। यह 573.29 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिले की कृषि, पेयजल तथा ग्रामीण आजीविका का मुख्य सहारा है।


