भारत में पहले कई रियासतें थीं और कई राजा राज करते थे। राजाओं के शाही ठाठ-बाट हुआ करते थे। लेकिन हिंदुस्तान की आजादी के बाद से राजाओं का शासन समाप्त हुआ और सभी रियासतें भारत में शामिल हो गईं।
राजाओं के शासन के समाप्त होने के बाद भी कई शाही परिवार ऐसे हैं, जो अभी भी महलों में रहते हैं और शान के साथ जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन 1971 में भारतीय संविधान के 26वें संशोधन में शाही परिवारों ने कई खास अधिकार खो दिए।
इन परिवारों ने भले ही शाही टाइटल और रुतबा खो दिया, फिर भी कुछ आज भी ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। इनके पुरखों की छोड़ी हुई शोहरत और दौलत की वजह से इन्हें अपनी शाही पहचान बनाए रखने में मदद मिली।
आइए जानते हैं कि भारत में ऐसे रहने वाले कितने शाही परिवार हैं, जिनके पास आज भी भारी दौलत और प्रॉपर्टी है।
जोधपुर की रॉयल फैमिली
महाराज गज सिंह द्वितीय की लीडरशिप में जोधपुर का रॉयल परिवार शाही विरासत और मॉडर्न एंटरप्रेन्योरशिप का एक शानदार उदाहरण कहा जा सकता है। जोधपुर की रॉयल फैमिली की नेट वर्थ 22,000 करोड़ रुपये के करीब है।
यह परिवार दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेट घरों में से एक, मशहूर उम्मेद भवन पैलेस से राज करता है। यह फैमिली पारंपरिक राजघराने से आज के बिजनेस दिग्गजों तक के सफल बदलाव को दिखाती है।
जयपुर की रॉयल फैमिली
राजस्थान के बीचों-बीच बसा जयपुर का शाही परिवार, जिसे कछवाहा वंश के नाम से जाना जाता है, आज भी इस इलाके की शाही विरासत और सांस्कृतिक शान को दिखाता है। जयपुर के आखिरी नाम के मुखिया भवानी सिंह का अप्रैल 2011 में 79 साल की उम्र में निधन हो गया।
भवानी सिंह ने 1951 से 1975 तक इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल और ब्रिगेडियर के तौर पर भी काम किया। कोई बेटा नहीं होने के कारण, भवानी सिंह ने अपनी इकलौती बेटी, दीया कुमारी के बेटे, पद्मनाभ सिंह को अपना वारिस बनाने का फैसला किया।
पद्मनाभ को 2011 में जयपुर के महाराजा का ताज पहनाया गया। भारत के सबसे अमीर शाही परिवारों में से एक, भवानी सिंह का वंश पद्मनाभ सिंह के ज़रिए आगे बढ़ा, जो अब जयपुर के महाराजा की उपाधि रखते हैं। इस परिवार की अनुमानित नेट वर्थ 20,000 करोड़ रुपये के करीब है।
बड़ौदा के गायकवाड़
गायकवाड़ राजवंश, एक मशहूर मराठा खानदान है, जो कि भारत के शाही इतिहास का एक अहम हिस्सा रहा है। इसकी जड़ें 18वीं सदी की शुरुआत तक जाती हैं, जब पिलाजी राव गायकवाड़ ने मुगल साम्राज्य से बड़ौदा शहर जीतकर अपना राज शुरू किया था।
इस समय समरजीतसिंह गायकवाड़ वडोदरा के शाही परिवार के मुखिया हैं। जब वे गद्दी पर बैठे, तब उनके पास करीब 20,000 करोड़ रुपये थे।


