MMUT गोरखपुर में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक का विकास, IIT BHU भी देगा सहयोग
यूपीनेडा (उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण) से मिली जिम्मेदारी के क्रम में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने ग्रीन हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन के रूप में विकसित करने को लेकर बनाई गई योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।
योजना के क्रियान्वयन के लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापना होने जा रही है। इसके लिए परिसर में साढ़े सात एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। ग्रीन ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के संश्लेषण, भंडारण और उपयोग की व्यावहारिक तकनीक विकसित करने के लिए सात सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी बना दी गई है।
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन व संश्लेषण पर शोध के लिए 50 करोड़ रुपये के अनुदान की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। इसमें दो-तिहाई धनराशि एमएमयूटी और एक-तिहाई आइआइटी, बीएचयू को प्राप्त होगी। आइआइटी बीएचयू को ग्रीन हाइड्राेजन के ईंधन के रूप में इस्तेमाल पर काम की जिम्मेदारी सौपी गई है। इसे लेकर दोनों संस्थानों में सहमति पहले ही बन चुकी है।
ग्रीन हाइड्रोजन विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में बनाया जाने वाला केंद्र हब एंड स्पोक माडल पर स्थापित होगा, जिसमें आइआइटी बीएचयू मार्गदर्शक संस्थान की भूमिका निभाएगा। प्रस्तावित केंद्र बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन तथा इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक पर शोध को बढ़ावा देगा। विशेष फोकस बायोमास आधारित हाइड्रोजन संश्लेषण पर रहेगा, जिससे कृषि अपशिष्ट का ऊर्जा में रूपांतरण संभव होगा।
यह पहल न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। केंद्र को गोरखपुर से वाराणसी तक ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन व बसों की व्यावहार्यता विकसित करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।


