80 और 90 के दशक में जिले में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं। लोगों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने लगा। सलोन में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुआ।
बड़ी-बड़ी इकाइयां चल पड़ी। एक समय था जब सलोन के बगहा में स्थापित वेस्पा स्कूटर फैक्ट्री के नाम से ही यहां के ग्रामीणों की पहचान हुआ करती थी, वो इसी से जाने जाते थे। धीरे-धीरे फैक्ट्री के सायरन की आवाज बंद हो गई और पूरा क्षेत्र वीरान हो गया।
उक्त भूमि यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने वापस ले ली है। अब यहां फिर से औद्यौगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाने लगी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही यहां सायरन की आवाज गूंजेगी। इसके प्रयास शुरू हो गए हैं।
बगहा में 95 एकड़ में 1984 में एलएमएल वेस्पा स्कूटर फैक्ट्री की स्थापना की गई थी। उसके बाद सैकड़ों लोगों को उनके घर के पास ही रोजगार मिलने लगा।
सलोन विधानसभा क्षेत्र के साथ ही प्रतापगढ़ जनपद तक के लोग भी यहां रोजगार के अवसर तलाशने आते हैं और रोजगार भी मिला। बगहा व आसपास के उमरी गांव की पहचान इसी फैक्ट्री से होने लगी थी। सलोन में बड़ी इकाई की स्थापना के बाद उम्मीद जगी थी कि यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से विकसित हो सकेगा।
दो दशक बाद ही फैक्ट्री बंदी के कगार पर पहुंच गई। फैक्ट्री बंद होने के बाद पूरा क्षेत्र वीरान हो गया और तब से आसपास किसी उद्योग की स्थापना नहीं हो सकी थी। अब वेस्पा स्कूटर फैक्ट्री की भूमि को यूपीसीडा ने ले लिया है।
यूपीसीडा की ओर से 95 एकड़ क्षेत्रफल में प्लाट बनाए जा रहे हैं, ताकि लघु उद्योग स्थापना की ओर कदम बढ़ सके। प्लाट आवंटन की प्रक्रिया भी दिसंबर से शुरू हो गई है।


