केंद्रीय बजट से ठीक पहले भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव देखने को मिला है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया करीब 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया और 91.98 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इसके साथ ही भारतीय मुद्रा ने अपने पिछले ऐतिहासिक निचले स्तर 91.9650 को भी पीछे छोड़ दिया।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, लगातार कमजोर हो रहे विदेशी पूंजी प्रवाह और आगे संभावित गिरावट से बचाव के लिए निवेशकों द्वारा की जा रही आक्रामक हेजिंग ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया। यही कारण है कि घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रहे सकारात्मक संकेत भी बाजार को सहारा देने में नाकाम रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और उभरते बाजारों से पूंजी निकासी ने भारतीय मुद्रा की कमजोरी को और गहरा किया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आयात बिल बढ़ने की आशंका भी रुपये की गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही है।
गुरुवार को कारोबार के दौरान रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स और भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञ अब भी आशावादी बने हुए हैं। आने वाले दिनों में बजट और वैश्विक संकेतों के आधार पर रुपये की दिशा तय होने की उम्मीद है।


