मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार की शाम एक टैंकर पलटने से लंबा जाम लग गया। हजारों गाड़ियों की कतार लग गई। आवाजाही पूरी तरह से ठप पड़ गई। लोग 33 घंटे इस जाम में फंसे रहे।
इस दौरान यात्रियों का गुस्सा चरम पर था। हादसे के 1 घंटे बाद एक्सप्रेसवे से मलबे को हटाया गया, तब जाकर आवाजाही दुबारा शुरू हुई। इस घटना के दो दिन बाद, लंबे समय से लंबित मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर फिर से बहस शुरू हुई।
यह 13.3 किलोमीटर लंबा बाईपास मुंबई-पुणे को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात भीड़ को कम करने और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की आई याद
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे समेत राज्य के नेताओं ने संकट से निपटने के सरकारी तरीके की आलोचना की और बार-बार लगने वाले जाम को रोकने और आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए स्पष्ट योजना की मांग की।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को आपातकालीन यातायात प्रतिक्रिया योजना तैयार करने और मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट?
मिसिंग लिंक 6,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के सबसे भीड़भाड़ वाले और दुर्घटना संभावित हिस्सों में से एक, खोपोली-खंडाला घाट स्ट्रेच को बायपास करना है।
यह रूट अभी 19.8 किलोमीटर के एक संकरे, घुमावदार हिस्से से गुजरता है, जहां संकरे मोड़ और ट्रैफिक के मिलने से अक्सर जाम लग जाता है, खासकर वीकेंड और त्योहारों के समय यहां जाम ज्यादा होता है।
इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं:
- लगभग 1.6 किमी और 8.9 किमी लंबी दो जुड़वां सुरंगें, जो पहाड़ियों को पार करने के लिए बनाई गई हैं
- दो केबल-स्टे पुल, जिसमें टाइगर वैली पर एक पुल शामिल है, जो भूकंपीय सुरक्षा के लिए ऊंचे स्तंभों पर आधारित
- एक नया संरेखण जो खोपोली निकास और कुसगांव के बीच दूरी को 19.8


