मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विपक्ष पर निशाना, कहा- ‘चुप रहना गैर-जिम्मेदाराना बोलने से बेहतर’

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मुख्यमंत्री ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि वह या उनकी सरकार जनता की भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर चुप रही है।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बाहर की जेलों में बंद कैदियों, पत्रकारों के उत्पीड़न और लोकतांत्रिक चिंताओं समेत हर अहम विषय पर अपनी बात मजबूती से रखी है।उन्होंने मस्जिदों के इमामों के अनावश्यक सर्वेक्षण और बुनियादी नागरिक मुद्दों—जैसे बर्फ हटाने में देरी को उठाने पर पत्रकारों को तलब किए जाने पर भी सवाल खड़े किए।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरियों को निशाना बनाए जाने और उनकी आवाज दबाने के मामलों को भी कई मंचों पर उठाया है, जिसमें उत्तर क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां देश को जोड़ने के बजाय दूरियां बढ़ाती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह इन चिंताओं को केंद्रीय गृह मंत्री के साथ होने वाली मुलाकात में भी दोबारा उठाएंगे।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने 2008 के अमरनाथ भूमि विवाद और 2016 के अशांति काल का उल्लेख किया और कहा कि उस समय कुछ नेताओं की चुप्पी, या असंवेदनशील बयान, हालात को और बिगाड़ने वाले थे। उन्होंने कहा की कि कई बार चुप रहना, गैर-जिम्मेदाराना बोलने से बेहतर होता है।

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