उत्तराखंड की आंधी में उड़ा झारखंड, रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहली बार मारी एंट्री

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घरेलू मैदान पर रणजी ट्रॉफी क्वॉर्टर फाइनल खेलने उतरी झारखंड की टीम का सपना उत्तराखंड ने चकनाचूर कर दिया। जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में उत्तराखंड ने झारखंड को एक पारी और छह रनों से करारी शिकस्त देकर पहली बार सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस ऐतिहासिक जीत के नायक मयंक मिश्रा रहे, जिन्होंने अपनी फिरकी का जाल बुनते हुए दूसरी पारी में पांच महत्वपूर्ण विकेट झटके।

मैच के तीसरे दिन झारखंड की टीम जब दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी तो उस पर उत्तराखंड की पहली पारी की 136 रनों की बढ़त का दबाव साफ दिखा। हालांकि, कप्तान विराट सिंह (55) और कुमार कुशाग्र (34) ने कुछ संघर्ष दिखाया और एक समय टीम का स्कोर दो विकेट पर 100 रन था। ऐसा लग रहा था कि झारखंड मैच में वापसी कर सकती है, लेकिन यहीं से उत्तराखंड के गेंदबाजों ने कहर बरपाना शुरू किया।

मयंक मिश्रा की घातक गेंदबाजी

मयंक मिश्रा की घातक गेंदबाजी के सामने झारखंड का मध्यक्रम और निचला क्रम पूरी तरह ध्वस्त हो गया। टीम ने महज 30 रनों के भीतर अपने आखिरी आठ विकेट गंवा दिए। पूरी टीम 41.1 ओवर में 130 रन बनाकर पवेलियन लौट गई। मिश्रा ने 13.1 ओवर में सिर्फ 22 रन देकर 5 विकेट अपने नाम किए। उनका अच्छा साथ अभय नेगी ने दिया, जिन्होंने चार सफलताएं हासिल की।

कुणाल चंदेला की कप्तानी पारी

इससे पहले, टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए झारखंड ने अपनी पहली पारी में आदित्य सिंह के 83 और कप्तान विराट सिंह के 47 रनों की मदद से 235 रन बनाए थे। जवाब में उत्तराखंड ने जगदीश सुचित (70), कप्तान कुणाल चंदेला (68) और अविनाश सुधा (64) के अर्धशतकों की बदौलत अपनी पहली पारी में 371 रन बनाकर मजबूत बढ़त हासिल की थी, जो अंत में निर्णायक साबित हुई। मयंक मिश्रा को उनके हरफनमौला प्रदर्शन (मैच में 8 विकेट) के लिए प्लेयर आफ द मैच चुना गया। इस जीत के साथ ही उत्तराखंड ने रणजी ट्राफी के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

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