जम्मू-कश्मीर में हर दिन 40-50 लाख रुपये की एंटीबायोटिक्स की बिक्री, अनुमान से अधिक हो सकते हैं आंकड़े

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जम्मू-कश्मीर में भी एंटी बायाेटिक की बिक्री हर दिन लाखों रुपयों में होती हैं। शहरी क्षेत्रों में जहां पर अस्पताल नजदीक हैं, वहां पर अधिकांश बिक्री डाक्टर की पर्ची के आधार पर ही होती हैं लेकिन जिन जगहों पर अस्पताल नजदीक नहीं हैं या फिर ग्रामीण क्षेत्र हैं वहां पर बिना पर्ची के भी धडल्ले से बिक्री हो रही हैं और कई जगहों पर मरीज बिना पर्ची के दवा खरीदने के लिए विवश भी हैं।

जम्मू-कश्मीर में एंटीबायाटिक्स की बिक्री के सही आंकड़े तो नहीं हैं लेकिन दवा बिक्रेताओं व विभिन्न संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के बाद यह अनुमान लगाया गया है कि हर दिन चालीस से पचास लाख रुपयों की एंटीबायाटिक्स बिकती हैं।यह बिक्री इससे भी अधिक हो सकती है।

राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू के आसपास स्थित कुछ प्रमुख दवा की दुकानों में औसतन हर दिन बीास से पच्चीस हजार रुपयों तक की एंटी बायाेटिक प्रति दुकान बिकती हैं। लेकिन जब जिला अस्पतालों और उप जिला अस्पतालों के आसपास की दुकानों की बात करें तो यह बिक्री तीन से पांच हजार हजार प्रति दुकान हो जाती हैं। कुछ दुकानों में इससे भी अधिक बिक्री होती है लेकिन यह चुनिंदा दुकानें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यही आंकड़े तीन सौ से एक हजार प्रति दुकान तक हैं।

जम्मू संभाग में दवा की करीब आठ हजार दुकानें हैं जबकि कश्मीर संभाग में दस हजार से अधिक दुकानें हैं। इन सभी दुकानों पर एंटी बायाेटिक आसानी के साथ मिल जाती हैं। इसके लिए डाक्टर की पर्ची होना अनिवार्य नहीं हैं। हालांकि ड्रग और कास्मेटिक एक्ट के अनुसार कुछ एंटीबायाटिक शेडयूल एच में रखी गई हैं जो कि बिना डाक्टर की पर्ची के नहीं बिक सकती हैं लेकिन यहां पर इतनी सख्ती नहीं हैं कि केमिस्ट इन्हें न बेचें।

तीस से चालीस प्रतिशत पर्चियों में लिखी होती हैं एंटीबायाटिक्स

राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू हो या फिर अन्य जिलों के मेडिकल कालेज व अस्पताल, डाक्टरों द्वारा लिखी गई पर्चियों में तीस से चालीस प्रतिशत में कोई न कोई एंटी बायाेटिक लिखी होती हैं।ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ एंटी बायोटिक की बिक्री पर सख्ती की जाती है लेकिन ऐसी सख्ती नहीं है जैसी कि नशा करने के लिए जिन दवाओं का इस्तेमाल होता है, उन पर सख्ती है। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर के बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर डाक्टर ही उपलब्ध नहीं हैं।अगर क्षेत्रों में अधिक सख्ती हो तो मरीजों को भी परेशानी होगी।

1800 लोगों पर है एक डॉक्टर

जम्मू-कश्मीर में एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 1800 लोगों पर एक डॉक्टर है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इससे भी बदतर है। अस्पतालों में तीस से चालीस प्रतिशत डाक्टरों के पद खाली पड़े हुए हैं। सर्दी, खांसी, जुकाम या फिर किसी संक्रमण को लोग अधिक गंभीर नहीं मानते और डाक्टर को 200 रुपयों से लेकर पांच सौ रुपयों तक फीस देने के स्थान पर सीधे दवा खरीदने को प्राथमिकता देते हैं।

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