एम्स के नेत्र रोग विभाग में लेंस बेचा जा रहा है। आप सवाल करेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है, डाक्टर कैसे लेंस बेचते होंगे। हम बताते हैं, लेंस बेचने का तरीका। मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने पहुंचे लोगों को अच्छे गुणवत्ता का लेंस लगाने की सलाह दी जाती है। जब वह इसका रेट पूछते हैं तो छोटी सी पर्ची पर मोबाइल नंबर लिखकर दे दिया जाता है।
दैनिक जागरण ने रोगी को मिले मोबाइल नंबर पर फोन किया तो खेल उजागर हो गया। फोन काल रिसीव करने वाले ने बताया कि हमारे पास 11 हजार रुपये से लगायत 75 हजार रुपये तक का लेंस है। आप रुपये जमा करेंगे तो हम सीधे आपरेशन के दिन डाक्टर के पास पहुंचा देंगे।
एम्स के नेत्र रोग विभाग में रोगियों को लेंस खरीदने के लिए पर्ची थमाना कोई नई बात नहीं है। हमेशा पर्ची दी जाती है लेकिन इस बार तो हद हो गई है। फेको मशीन कई दिनों से खराब है लेकिन फिर भी पर्ची दी जा रही है। इस पर्ची को बात करने के बाद बताया जा रहा है कि जैसे ही मशीन ठीक होगी, लेंस लगा दिया जाएगा।
कई दिनों से खराब है फेको मशीन
एम्स के नेत्र रोग विभाग में एक ही फेको मशीन है। यह मशीन भी कई दिनों से खराब है। कोई बताता है कि चार-पांच दिन में बन जाएगी तो कोई बताता है कि 10 दिन लग जाएंगे। बुधवार को दैनिक जागरण ने पड़ताल की तो कई ऐसे लोग मिले जो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण एम्स में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने आए थे। यह लोग कम से कम रुपये खर्च करना चाहते थे लेकिन इनको भी मोबाइल नंबर थमा दिया गया। बताया गया कि लेंस खरीदकर लगवाओगे तो ज्यादा दिन तक स्पष्ट दिखेगा।
जो सवाल-जवाब करता उसे अमृत फार्मेसी का रास्ता दिखाते
ओपीडी में आने वाले रोगियों को लेंस लगाने की सलाह देने के साथ ही मोबाइल नंबर दे दिया जाता है। यदि कोई लेंस की गुणवत्ता और खर्च को लेकर सवाल करता है तो उसे अमृत फार्मेसी का रास्ता दिखा दिया जाता है। साथ ही बताया जाता है कि कम रेट वाले लेंस की गुणवत्ता की जिम्मेदारी रोगी की होगी।
मामला आंख का होता है इसलिए ज्यादातर समझौता कर ज्यादा रुपये खर्च करते हैं। हालांकि ज्यादा रुपये में जो लेंस आता है, वह सीधे डॉक्टर के पास जाता है। राेगी को यह भी नहीं पता चलता कि आपरेशन थियेटर में उसे कौन सा लेंस लगाया गया है।
23 दिन में चार चक्कर लगा चुका हूं
कुशीनगर जिला के हाटा के रहने वाले 68 वर्षीय राजेंद्र को दाईं आंख से कम दिखता है। 12 जनवरी को पत्नी के साथ एम्स के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे। आंख में दवा डालकर कुछ देर बाद जांच की गई। इसके बाद दूसरे दिन आने को कहा गया। दुबारा आए तो लेंस की जांच की गई। फिर बताया गया कि दाईं आंख में मोतियाबिंद है। ऑपरेशन करना पड़ेगा।


