क्या चीन में कुछ होने वाला है? चिनफिंग ने एक साथ हटाए कई जनरल; किए बड़े बदलाव
दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शुमार चीन की सत्ता पर काबिज हुए शी चिनफिंग को करीब 14 वर्ष हो गए हैं। उन्होंने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए न केवल सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं बल्कि सेना में शीर्ष स्तर पर कई जनरलों की छुट्टी कर चुके हैं।
लेकिन सेना में जिस तरह जनरलों और एडमिरलों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं, उसके पीछे की वजह संदेह और खतरा बताया जा रहा है।चीनी रक्षा मंत्रालय ने गत 24 जनवरी को यह बताया था कि सेना के शीर्ष नेतृत्व जनरल झांग यूशिया और एसोसिएट जनरल लियू झेनली गंभीर उल्लंघनों को लेकर जांच में दायरे में हैं।
चिनफिंग का वफादार है झांग
झांग को चिनफिंग का वफादार माना जाता है। यह तो महज एक ताजा घटनाक्रम है, लेकिन बीते तीन वर्षों में चीनी सेना में ऐसा बदलाव हुआ है, जो देश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। न्यूयार्क टाइम्स के विश्लेषण के अनुसार, चिनफिंग ने खुद के द्वारा 2022 में केंद्रीय सैन्य आयोग में नियुक्त किए गए छह जनरलों में से एक को छोड़कर सभी को हटा दिया है।
जबकि 2023 की शुरुआत में 30 जनरल और एडमिरल थे, जो विभिन्न थिएटर कमांड और विशेष अभियानों की कमान संभाल रहे थे। इनमें से लगभग सभी को निकाल दिया गया है या गायब हो गए हैं।
इन कदमों की वजह से दुनिया की सबसे बड़ी सेना में शीर्ष स्तर पर नेतृत्व का बड़ा खालीपान हो गया है। वाल स्ट्रीट जर्नल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चीनी सैन्य अधिकारियों को बताया गया था कि झांग अमेरिकी सरकार के जासूस थे और उन्होंने परमाणु खुफिया जानकारी दी थी।
चला रखा है भ्रष्टाचार रोधी अभियान
2012 से चिनफिंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष हैं। जबकि 2013 से राष्ट्रपति हैं। अपने शासन की शुरुआत से ही चिनफिंग भ्रष्टाचार रोधी अभियानों के माध्यम से इस तरह का सफाया कर रहे हैं और सत्ता पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहे हैं। वह दशकों में देश के सबसे शक्तिशाली नेता बन गए हैं।
‘विरोधियों नहीं करीबियों से ज्यादा खतरा’तानाशाही पर किताब लिखने वाले जर्मन राजनीतिक विश्लेषक मार्सेस डिर्सस का कहना है कि ऐसे तानाशाह को सबसे ज्यादा खतरा प्रदर्शनकारियों और विरोधियों से नहीं बल्कि अपने करीबियों से लगता है। उन्होंने कहा, ‘एक तानाशाह हमेशा आशंकित रहता है। उसे हर वक्त लगता है कि खतरा मंडरा रहा है। वह कभी यह समझ नहीं पाता कि कौन वास्तव में वफादार है या धोखा दे रहा है।’
अमेरिकी विश्लेषकों का यह है आकलन
अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया विश्लेषक हालिया वर्षों में अपने आकलन में इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि चिन¨फग बहुत आशंकित रहते हैं। हालांकि कई मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चिन¨फग की हालिया कार्रवाई के पीछे कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। ऐसे कदमों का मकसद राजनीतिक चुनौती से खुद का बचाव करना या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में शीर्ष स्तर पर भष्टाचार को खत्म करने का प्रयास हो सकता है।


