पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से तुरंत दखल देने की मांग की है। आयोग ने कोर्ट से कहा है कि SIR का काम कर रहे अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों के एक सिस्टमैटिक पैटर्न को रोका जा सके।
आयोग ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के भाषणों से ऐसी स्थितियों को बढ़ावा मिला, जबकि पुलिस दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।
EC ने अपने हलफनामे में कहा, “यह साफ तौर पर दिखाता है कि पश्चिम बंगाल में आने वाली चुनौतियां SIR प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये राज्य मशीनरी की कमियों और वहां मौजूद राजनीतिक दखल के माहौल का सीधा नतीजा हैं।”
‘अधिकारियों के बीच डर का माहौल बन रहा’
हलफनामे में कहा गया, “यह विचित्र और चिंताजनक गड़बड़ी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा के लिए SC के तुरंत दखल की मांग करती है। CM ने लगातार कई ऐसे सार्वजनिक भाषण दिए हैं जो स्वाभाविक रूप से भड़काऊ हैं, जिससे चुनाव अधिकारियों के बीच डर का माहौल बन रहा है”।
EC ने दावा किया कि 14 जनवरी को CM ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डर फैलाने की कोशिश की, SIR प्रक्रिया के बारे में गुमराह करने वाली और गलत जानकारी फैलाई, खुले तौर पर चुनाव अधिकारियों को धमकी दी और निशाना बनाया और मतदाताओं के बीच डर पैदा करने की कोशिश की।
‘CM ने माइक्रो-ऑब्जर्वर हरि दास को निशाना बनाया’
चुनाव आयोग ने कहा, “CM ने साफ तौर पर एक माइक्रो-ऑब्जर्वर हरि दास को निशाना बनाया। इससे एक चुनावी अधिकारी को सार्वजनिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया और उस पर बेवजह दबाव और धमकी दी गई। इससे चुनावी अधिकारियों की आजादी, निष्पक्षता और सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में पड़ गई।”
नतीजतन, मुर्शिदाबाद निर्वाचन क्षेत्र के नौ माइक्रो-ऑब्जर्वर ने मिलकर पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर बदमाशों की ओर से किए गए हिंसक हमलों और सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजामों के कारण SIR प्रक्रिया से औपचारिक रूप से अपना नाम वापस ले लिया।
आयोग ने कहा, 15 जनवरी को उत्तर दिनाजपुर जिले में जहां SIR का काम चल रहा था उस जगह पर 700 लोगों की भीड़ ने हमला किया।


