सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि वर्ष 2021 में नोएडा में दर्ज कथित घृणा अपराध की प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (IPC) के उचित प्रविधानों को क्यों नहीं लागू किया गया।
उत्तर प्रदेश की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को सूचित किया कि उन्होंने मामले के संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल उठाया, “क्या इससे उस समस्या का समाधान हो जाएगा, जिसके कारण मामले का पंजीकरण उचित प्रविधानों के तहत नहीं हुआ?”
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और प्राथमिकी पंजीकरण में अनुशासन और कानूनी प्रविधानों के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


