FOLLOW-UP: खबर के बाद बोले साहब; हां, राखड़ बांध का पानी रिंहद में मिल रहा था हमने कहा है, NTPC अब ऐसा नहीं करेगा?

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सिंगरौली। सिंगरौली जिले में जो भी नया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अधिकारी आता है कुछ ही समय के अंतराल के बाद वह एनटीपीसी की जी हुजूरी करने ही लगता है और करें भी क्यों ना? क्योंकि साहब लोगों को एनटीपीसी के रहमों – करम पर ही तो रहने के लिए मकान मिलता है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो एनटीपीसी रहने के लिए अपने टाउनशिप के अंदर कमरा उपलब्ध नहीं कराएगा लिहाजा साहब को किराए के रूम में रहना पड़ेगा।

अभी ताजा मामला हाल ही में प्रकाश में आया है जहां एनटीपीसी के शाहपुर क्षेत्र के राखड़ बांध क्रमांक V1 से राख युक्त पानी रिहंद डैम में मिलाए जाने का मामला सुर्खियों में आया था। जबकि एनजीटी ने “जीरो लिक्विड डिसचार्ज” (ZLD) जैसे कड़े नियम बना रखा है। जिस नियम को संबंधित सभी कंपनियों को शत प्रतिशत पालन करना होता है।

इस नियम के तहत राखड़ बांध से शून्य की मात्रा में भी पानी प्राकृतिक एवं निर्मित नदी, नालों एवं जलाशय में नहीं जाना चाहिए। राखड़ बांध का पानी फिल्टर करने के उपरांत फिर संबंधित कंपनियों द्वारा प्रयोग में लिया जा सकता है लेकिन किसी भी स्थिति में जलाशयों में ये पानी नहीं मिलना चाहिए। मगर बावजूद इसके यहां एनटीपीसी ने अपनी मनमानी करते हुए एनजीटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई और मामले के प्रकाश में आने के बाद सिंगरौली जिले के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच में मौके पर गए और जांच में उन्होंने एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ते पाया। मगर साहब कंपनी पर मेहरबानी करते हुए यह कहा कि ऐसा मत करना!

साहब के इस उत्तर ने कई नए सवाल खड़े कर दिया हैं –

  • क्या संबंधित कम्पनियां अपनी मनमानी करती रहेगी और सिंगरौली सोनभद्र के लोगों के साथ छलावा करती रहेगी और साहब कंपनियों पर मेहरबानी दिखाते रहेंगे?
  • क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कंपनियों को प्रदूषण फैलाने का छूट दे रहे हैं? 
  • अब तक सिंगरौली सोनभद्र का एकमात्र जल स्रोत को एनटीपीसी द्वारा दूषित किया जा रहा था इस संबंध में एनटीपीसी पर क्या कार्रवाई की गई? 
  • आखिर एनटीपीसी पर साहब के मेहरबानी का राज क्या है?
  • साहब, वेतन तो मध्य प्रदेश सरकार से लेते हैं लेकिन नौकरी क्या एनटीपीसी की कर रहे हैं? 
  • आखिर क्यों मीडिया के सवालों से बचाने का हर संभव प्रयास में जुटे हैं साहब?
  • कहीं, साहब का जिले के अधिकतर कंपनियों से सुविधा शुल्क तो सेट नहीं?

खैर, साहब द्वारा दिए गए मीडिया इंटरव्यू में यह तो साफ हो गया कि साहब एनटीपीसी पर मेहरबान तो है, लेकिन यह साबित नहीं हो सका की इस मेहरबानी के पीछे क्या राज है?

अगले अंक में शेष खबर…

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