वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी को फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा की। इस फैसले के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली।
नए प्रावधानों के तहत फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। यानी फ्यूचर ट्रेडिंग पर टैक्स में 150% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT पहले की तरह 0.1% ही रहेगा, जो प्रीमियम के सेल साइड पर लागू होता है। हालांकि, ऑप्शंस पर टैक्स में भी 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह कर केवल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू के सेल साइड पर लागू होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से राजस्व में वृद्धि होगी और डेरिवेटिव मार्केट में पारदर्शिता आएगी। लेकिन निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह फैसला झटका साबित हुआ है।
घोषणा के तुरंत बाद ही शेयर बाजार में कमजोरी का दौर शुरू हो गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों में भारी गिरावट देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक निफ्टी 115 अंकों की गिरावट के साथ 25,250 के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में अरबों रुपये का नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि STT में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से डेरिवेटिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ जाएगी। इससे छोटे निवेशकों और रिटेल ट्रेडर्स पर सीधा असर पड़ेगा। कई ब्रोकर्स का मानना है कि टैक्स बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम घट सकता है और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
फ्यूचर और ऑप्शन मार्केट भारतीय शेयर बाजार का अहम हिस्सा है। यहां रोजाना लाखों करोड़ रुपये का लेन-देन होता है। ऐसे में STT में बढ़ोतरी का असर पूरे इक्विटी मार्केट पर पड़ना तय है। निवेशकों का कहना है कि सरकार को टैक्स बढ़ाने से पहले बाजार की स्थिति और निवेशकों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए था।
हालांकि, सरकार का तर्क है कि टैक्स बढ़ोतरी से राजस्व में मजबूती आएगी और वित्तीय अनुशासन कायम होगा। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अल्पकालिक रूप से बाजार की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
निवेशकों के बीच इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ का कहना है कि यह कदम लंबे समय में बाजार को स्थिरता देगा, जबकि अधिकांश ट्रेडर्स इसे निवेशकों के लिए बोझ मान रहे हैं।
फिलहाल, बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है और निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टैक्स बढ़ोतरी का असर किस हद तक बाजार की दिशा तय करता है।


