सड़क पर आया झंझारपुर का व्यापारी परिवार, बैंक की वसूली से ठंड में ठिठुरे बच्चे

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झंझारपुर में बुधवार की रात बैंक की वसूली कार्रवाई ने मानवता को झकझोर कर रख दिया। यूनियन बैंक द्वारा एक छोटे व्यापारी के घर पर ताला लगाए जाने के बाद पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे ठंड में रात गुजारने को मजबूर हो गया। ठंड से कांपते छोटे-छोटे बच्चों की हालत देखकर स्थानीय लोग भी भावुक हो उठे।

पीड़ित व्यापारी संजय कुमार राय झंझारपुर आरएस क्षेत्र में वर्षों से ‘श्री मां श्रीमती रेडीमेड स्टोर’ का संचालन कर रहे थे। वर्ष 2017 में उन्होंने व्यवसाय विस्तार के लिए यूनियन बैंक से 9 लाख रुपये का कैश क्रेडिट लिया था। शुरुआत में कारोबार अच्छा चला, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान दुकान बंद हो गई और आमदनी पूरी तरह ठप हो गई।

इस दौरान बैंक की ओर से कोरोना सहायता के रूप में मिली 1.70 लाख रुपये की राशि को भी ऋण खाते में जोड़ दिया गया, जिससे कुल देनदारी बढ़कर 10.70 लाख रुपये हो गई। इसके बावजूद संजय कुमार राय ने हार नहीं मानी और अब तक लगभग 9.81 लाख रुपये बैंक में जमा कर दिए। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वे दिल्ली जाकर मजदूरी तक करने को मजबूर हुए।

इसके बाद भी सितंबर 2022 में बैंक ने उनका खाता एनपीए घोषित कर दिया। 21 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन के आदेश का हवाला देते हुए बैंक की ओर से नोटिस जारी किया गया कि 28 जनवरी को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में घर सील किया जाएगा।

अंतिम प्रयास के तौर पर संजय कुमार राय ने 27 जनवरी को कर्ज लेकर 5 लाख रुपये बैंक में जमा किए और शेष राशि चुकाने के लिए 10 दिन की मोहलत मांगी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने राहत देने से इनकार कर दिया।

बुधवार की शाम प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही घर पर ताला लगा दिया गया। इसके बाद व्यापारी, उसकी पत्नी और बच्चे घर के बाहर ही बैठ गए। ठंड से कांपते बच्चों को देखकर आसपास के लोगों ने कंबल और चाय देकर मदद करने की कोशिश की, लेकिन परिवार के सिर से छत छिन चुकी थी।

स्थानीय लोगों ने बैंक की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। इस संबंध में यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक पंकज पाठक ने बताया कि ऋणी पर कुल बकाया राशि लगभग 13 लाख रुपये है। पूरी रकम जमा होने के बाद ही बैंक की ओर से कोई राहत दी जा सकती है।

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