पिछले महीनों के भीतर 5 पश्चिमी देशों के नेता चीन का दौरा कर चुके हैं। ब्रिटेने के पीएम कीर स्टार्मर बुधवार को तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे। स्टार्मर से पहले फ्रांस, कनाडा, फिनलैंड और आयरलैंड के लीडर्स चीन का दौरा कर चुके हैं।
वहीं, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अगले महीने 24 से 27 फरवरी के बीच चीन का दौरा करने वाले हैं।
दरअसल, ट्रंप की आक्रमक नीतियों की वजह से ग्लोबल बैलेंस शिफ्ट हो रहा है। पश्चिमी देशों के नेता लगातार चीन के दौरे पर जा रहे हैं। पश्चिमी देशों के नेताओं की चीन दौरे की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनकी टैरिफ की धमकियों को माना जा रहा है।
अमेरिका से उठ रहा भरोसा
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के NATO पर सवाल उठाने, ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग और गठबंधन की अनदेखी रवैयै के चलते यूरोपीय देशों का अमेरिका से भरोसा उठ रहा है। यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ से व्यापार में अनिश्चितता का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका द्वारा यूरोपीय देशों पर लगे 15% टैरिफ का सीधे तौर पर फ्रांस और जर्मनी पर पड़ा है। हाल ही में ट्रंप ने यूरोप के उन 8 देशों को 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। जो ग्रीनलैंड में अमेरिकी कब्जे का विरोध कर रहे हैं।
ट्रंप ने दी थी धमकी
गौरतलब है कि बीते 23 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के मंच से ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब यूरोपीय देशों को अपने बाजार और सैन्य सुरक्षा की सुविधा मुफ्त में नहीं देगा। ट्रंप ने कहा कि वे अपने ‘ट्रेड वॉर’ को आगे बढ़ाएंगे और टैरिफ को अमेरिकी बाजार में आने की कीमत बताया।
चीन से रिश्ते सुधारने में जुटे पश्चिमी देश
ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच पश्चिमी देश अब चीन से रिश्ते सुधारने की कोशिश में लग गए हैं। पश्चिमी देशों की चीन यात्राएं सिर्फ आर्थिक जरूरत नहीं हैं, बल्कि इन्हें रिश्ते और वैश्विक राजनीतिक में होने वाले बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
थिंक टैंक एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट का कहना है कि पश्चिमी देश अब चीन से टकराव की बजाय सीमित और संभले हुए रिश्ते रखना चाहते हैं, ताकि वे वैश्विक स्तर पर अकेले न पड़ जाएं। इधर चीन भी श्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।


