गुरुग्राम में फर्जी दस्तावेजों से मृत व्यक्ति का 500 गज का प्लॉट बेचा, 20 करोड़ की संपत्ति का मामला कोर्ट में

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हरियाणा के गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला रियल एस्टेट घोटाले का मामला सामने आया है। सेक्टर-53 स्थित सनसिटी सोसाइटी में फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक मृत व्यक्ति के नाम आवंटित 500 गज के प्लॉट को बेच दिया गया। वर्तमान में इस प्लॉट की बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

इस मामले में वर्ष 2024 में प्रदेश की एक जिला एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर (डीईटीसी) समेत कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और नियमित सुनवाई चल रही है। वहीं, मृतक के परिजन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर गुरुवार को पुलिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे।

पीड़ित परिवार की शिकायत पर डीसीपी हेडक्वार्टर ने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केस से जुड़े सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहनता से जांच की जा रही है और कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मामले के शिकायतकर्ता दिनेश ने बताया कि उनके भाई अनुराग के नाम पर वर्ष 2004 में सनसिटी सोसाइटी में 500 गज का प्लॉट नंबर B-30G आवंटित किया गया था। यह आवंटन कंपनी द्वारा ऑफर लेटर जारी किए जाने और पूरी भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया गया था। दिनेश के अनुसार, उनके भाई अनुराग ने प्लॉट के लिए सभी भुगतान अपने बैंक खाते से किए थे और संबंधित दस्तावेज पूरी तरह वैध थे।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-2005 के दौरान ऑफर लेटर मिलने और भुगतान के बाद प्लॉट का विधिवत आवंटन हुआ। सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन वर्ष 2013 में अनुराग का निधन हो गया। उस समय उनका बेटा पढ़ाई के लिए विदेश गया हुआ था, जिसका कथित तौर पर आरोपियों ने फायदा उठाया।

परिवार का आरोप है कि अनुराग की मौत के बाद बिना कानूनी वारिसों की जानकारी या सहमति के, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और प्लॉट को अवैध रूप से किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। जब परिवार को इस लेनदेन की जानकारी हुई, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में कुछ सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत हो सकती है। इसी आधार पर डीईटीसी जैसे वरिष्ठ पद पर तैनात अधिकारी का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, यह मामला अदालत में लंबित है और पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए हुए है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संपत्ति से जुड़ा फर्जीवाड़ा न केवल उनके परिवार के साथ अन्याय है, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर करता है। पुलिस और प्रशासन पर अब इस बात का दबाव बढ़ता जा रहा है कि मामले को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से अंजाम तक पहुंचाया जाए।

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