खजुरहट के पत्थरकट तिराहे में सुरक्षा व्यवस्था पर बम से हमला करने के मामले में न्यायालय ने सख्ती दिखाई है। विशेष न्यायाधीश एफटीसी प्रथम, प्रदीप कुमार सिंह ने आरोपित राधेश्याम गौतम को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में दोषी मानते हुए 17 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने इसके साथ ही दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो राधेश्याम गौतम को दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ चलने पर आरोपी अधिकतम 10 साल की सजा भुगतेगा।
राधेश्याम गौतम गोंडा जिले के मलथुआ सहजोत का निवासी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुरक्षा बलों पर हमले जैसे गंभीर अपराध के लिए किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती। ऐसे कृत्य न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पत्थरकट तिराहे पर यह हमला उस समय हुआ जब सुरक्षा बल इलाके में तैनात थे। आरोपी द्वारा विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल करना न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि इससे सुरक्षा बलों और आम नागरिकों की जान पर भी खतरा पैदा हुआ।
विशेष न्यायाधीश ने यह स्पष्ट किया कि आरोपित की गतिविधि आतंकवादी प्रवृत्ति की श्रेणी में आती है। अदालत के आदेश में कहा गया कि दोषी को न केवल कड़ी सजा दी जाए, बल्कि उसे यह भी एहसास होना चाहिए कि कानून किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करता।
विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा के तहत यह मामला विशेष गंभीर माना गया। अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत को यह साबित किया कि राधेश्याम गौतम ने जानबूझकर सुरक्षा बलों पर हमला किया। अदालत ने अभियोजन के दावे को मानते हुए सजा सुनाई।
इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया था। पुलिस और प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोका जा सके। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की थी कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल अपराधियों में भय पैदा होता है, बल्कि कानून और सुरक्षा बलों की गंभीरता का भी संदेश जाता है। सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले अपराधियों को कठोर सजा देना समाज और राज्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के लिए न्यायपालिका किसी भी प्रकार की ढील नहीं दिखाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों के साथ छेड़छाड़ या हमला करने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।


