देश के रियल एस्टेट सेक्टर में धीमी गति का दौर लगातार जारी है। इस बात की पुष्टि शेयर बाजार में रियल एस्टेट कंपनियों के लगातार गिरते शेयर और कंपनियों की कमजोर बिक्री रिपोर्ट कर रही हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के आठ प्रमुख शहरों में 2025 में कुल आवासीय बिक्री 12 प्रतिशत घटकर 3,86,365 इकाई तक रह गई, जो 2024 में 4,36,992 इकाई थी।
हालांकि दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों — बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई — में पिछले वर्ष आवासीय बिक्री में तेजी देखी गई। इन तीन शहरों में कुल आवासीय बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 1,33,000 इकाई से अधिक रही, जो यह दर्शाता है कि दक्षिण भारत में रियल एस्टेट मार्केट अभी भी निवेशकों और खरीदारों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
मुंबई स्थित सूचीबद्ध कंपनी आरम प्रापटेक की अधिग्रहीत कंपनी प्रापटाइगर ने गुरुवार को आठ प्रमुख शहरों के प्राथमिक आवासीय बाजार के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और जयपुर जैसे शहरों में कुल बिक्री में गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में आवासीय बिक्री में गिरावट के कई कारण हैं। इसमें बढ़ती ब्याज दरें, उच्च प्रॉपर्टी कीमतें और आर्थिक अनिश्चितता मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, महामारी के बाद खरीदारों की क्षमता और रियल एस्टेट कंपनियों की प्रोजेक्ट डिलीवरी की चुनौतियों ने भी बिक्री पर असर डाला है।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत के शहरों में बिक्री में बढ़ोतरी का कारण मजबूत आईटी और सर्विस सेक्टर, रोजगार में वृद्धि और नई इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से निवेशकों का बढ़ता भरोसा है। इसके विपरीत, मुंबई, पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में महंगाई और निर्माण लागत में वृद्धि से खरीदारों की मांग पर नकारात्मक असर पड़ा है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आवासीय बिक्री में गिरावट के बावजूद, डेवलपर्स ने नई प्रोजेक्ट्स में निवेश जारी रखा है। कंपनियां अब नई रणनीतियों के तहत प्रोजेक्ट्स में फ्लेक्सिबल भुगतान योजनाओं और आकर्षक डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं ताकि खरीदारों को आकर्षित किया जा सके।
आरम प्रापटेक और प्रापटाइगर के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि रियल एस्टेट सेक्टर में क्षेत्रीय अंतर और बाजार की विविधता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जहां दक्षिण भारत में तेजी देखी गई, वहीं उत्तर और पश्चिम भारत में मंदी का असर साफ नजर आया।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि निवेशकों को अब बाजार के रुझानों का ध्यान रखते हुए निवेश करना चाहिए। जबकि लंबी अवधि में रियल एस्टेट क्षेत्र निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, वहीं अल्पकालिक चुनौतियों का सामना करना जरूरी है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि 2025 में देश के रियल एस्टेट सेक्टर में कुल आवासीय बिक्री में गिरावट के बावजूद कुछ क्षेत्रीय बाजार तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस मिश्रित परिदृश्य में खरीदारों और निवेशकों के लिए समझदारी से निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।


