सिवनी: प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम जोड़ने के नाम पर रिश्वत लेते रोजगार सहायक गिरफ्तार

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सिवनी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नाम जोड़ने और पहली किस्त की प्रक्रिया में रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने ग्राम पंचायत साल्हे कोसमी में पदस्थ रोजगार सहायक ओमेंद्र कुमार पारधी को गुरुवार को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई बरघाट जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत साल्हे कोसमी में की गई। पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले ने बताया कि शिकायतकर्ता ग्राम साल्हे कोसमी निवासी और उपसरपंच अब्दुल वहाब खान ने लोकायुक्त कार्यालय में आवेदन दिया था। शिकायत में कहा गया कि उनकी पत्नी सबीना बी का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में पहले जोड़ा जाए और पहली किस्त के रूप में 1.50 लाख रुपये शीघ्र स्वीकृत कराए जाए।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि इसके बदले रोजगार सहायक ओमेंद्र कुमार पारधी ने कुल 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी का स्पष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को नियमों के अनुसार सुविधा प्रदान की जाती है, लेकिन ऐसे मनमाने अधिकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर लाभार्थियों से अवैध धन की मांग करते हैं।

लोकायुक्त जबलपुर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई और उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस गिरफ्तारी से यह संदेश जाता है कि सरकारी योजनाओं में भ्रस्टाचार करने वाले अधिकारियों को किसी भी हालात में बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना अत्यंत जरूरी है। ऐसे मामलों में लोकायुक्त और अन्य जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, ताकि जनता का भरोसा सरकारी तंत्र पर बना रहे।

लोकायुक्त कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें भी सरकारी योजनाओं में किसी प्रकार की अनियमितता या रिश्वत मांगने की सूचना मिले, तो तुरंत शिकायत करें। इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलती है और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जा सकता है।

इस गिरफ्तारी के बाद बरघाट क्षेत्र में प्रशासनिक जागरूकता बढ़ी है। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे और किसी भी लाभार्थी को अवैध दबाव या धन की मांग का सामना न करना पड़े।

लोकायुक्त के अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। वहीं रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गई तो कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून और निगरानी तंत्र की मौजूदगी ही सरकारी योजनाओं को सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है।

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