महीनों से चली आ रही नौकरशाही अड़चनों का अंत करते हुए केंद्र सरकार ने ट्राईसिटी की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजना छह लेन जीरकपुर-पंचकूला बाईपास के निर्माण कार्य में आखिरी बाधा भी दूर कर दी है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने करीब 1,878 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्टेज-2 वन मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके साथ ही अब निर्माण कार्य के आवंटन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
परियोजना का महत्व
- यह परियोजना करीब एक दशक पुरानी परिकल्पना है।
- वर्ष 2020 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
- यह 19.2 किलोमीटर लंबी एक्सेस कंट्रोल्ड सड़क होगी, जो एनएच-7 पर जीरकपुर–पटियाला चौक से एनएच-5 पर जीरकपुर-परवाणू चौक तक जाएगी।
- इसमें 6.195 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन, कई फ्लाईओवर, अंडरपास, पुल और रेलवे ओवरब्रिज शामिल होंगे।
- आधुनिक सुरक्षा और ड्रेनेज सिस्टम भी परियोजना का हिस्सा होंगे।
ट्राईसिटी को लाभ
- परियोजना पूरी होने के बाद चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के भीतर से गुजरने वाला भारी ट्रैफिक बाहरी मार्गों पर स्थानांतरित हो सकेगा।
- इससे ट्रैफिक जाम में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन की बचत होगी।
- हिमाचल प्रदेश के लिए सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
निष्कर्ष
जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को ट्राईसिटी की सबसे अहम डी-कंजेशन परियोजना माना जा रहा है। अंतिम वन मंजूरी मिलने के बाद अब सभी की निगाहें एनएचएआई द्वारा कार्य आवंटन और निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत पर टिकी हैं। उम्मीद है कि वर्षों से ट्रैफिक जाम से जूझ रही ट्राईसिटी को जल्द ही इस परियोजना से बड़ी राहत मिलेगी।


