सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 2021 से लंबित नफरत फैलाने वाले भाषणों से संबंधित अधिकांश याचिकाओं को बंद कर देगा। इन याचिकाओं में अदालत ने पहले ही पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अदालत के निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन किए जाने की बात स्वीकार की। इसके बाद अदालत ने कई व्यक्तियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
पृष्ठभूमि
नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करे। इस मामले में कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिनमें कार्रवाई की मांग की गई थी। अब अदालत ने संकेत दिया है कि चूंकि निर्देशों का पालन हो रहा है, इसलिए इन याचिकाओं को बंद किया जा सकता है।
महत्व
यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि नफरत फैलाने वाले भाषणों पर कार्रवाई के लिए पहले से दिए गए निर्देश ही पर्याप्त हैं।


