मुख्यमंत्री के कई निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग में कर्मियों द्वारा ई-आफिस का प्रयोग शत-प्रतिशत नहीं किया जा सका। अब इस पर नाराजगी जताते हुए प्रदेशभर के उन कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची जारी की गई है, जिन्होंने डिजिटल पोर्टल का उपयोग नहीं किया।
ई-आफिस पोर्टल के माध्यम से सरकारी कर्मचारी इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग, प्रपत्र प्रबंधन, कैलेंडर और अन्य एप्लिकेशन तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल का उद्देश्य कर्मचारियों को डिजिटल वातावरण में फाइल बनाना, भेजना और प्राप्त करना आसान बनाना है।
शिक्षा निदेशक बेसिक, प्रताप सिंह बघेल ने इस अनुशासनहीनता को गंभीर माना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई-आफिस का प्रयोग न करना स्वीकार्य नहीं है। विभाग ने 900 कर्मियों का वेतन रोक दिया है। अधिकारी और कर्मचारी तब तक वेतन प्राप्त नहीं कर पाएंगे, जब तक कि वे ई-आफिस पोर्टल का नियमित उपयोग शुरू नहीं करते।
प्रताप सिंह बघेल ने कहा, “सभी कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे पोर्टल के माध्यम से अपने दैनिक कार्यों को संपन्न करें। इसका पालन न करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता में आता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-आफिस जैसी डिजिटल पहल से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ती है। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा इसका अनदेखा किया जाना विभागीय कार्य प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
शिक्षा विभाग ने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वेतन रोकने का यह कदम उन्हें डिजिटल पोर्टल के प्रयोग के प्रति गंभीर करने के लिए लिया गया है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ई-आफिस के माध्यम से ही भविष्य में सभी कार्य और फाइलें प्रेषित की जाएंगी।
इस दिशा में विभाग लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है, ताकि हर कर्मचारी डिजिटल प्रणाली में सहज हो सके और फाइलों का समय पर निपटान हो।


