बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) में संविदा कर्मियों की नियुक्ति को लेकर उठे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अब औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों में कथित रूप से पैसों की उगाही और नियमों की अनदेखी की शिकायतों के बाद बीईपी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
यह समिति पूरे मामले की गहन पड़ताल कर एक सप्ताह के भीतर अपनी स्पष्ट रिपोर्ट सौंपेगी।
जांच समिति का गठन
बीईपी की ओर से गठित जांच समिति में प्रशासी पदाधिकारी शाहजहां, असैनिक कार्य प्रबंधक (प्रभारी) भोला प्रसाद सिंह और लेखा पदाधिकारी मो. रहमतुल्लाह को शामिल किया गया है। समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह परिवाद पत्र में लगाए गए सभी आरोपों की बिंदुवार जांच करे और यह स्पष्ट करे कि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या नहीं।
निदेशक के निर्देश
बिहार राज्य परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने जांच समिति को निर्देश दिया है कि वे तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
संभावित कार्रवाई
नवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी कर्मियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिषद किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
बीईपी में संविदा नियुक्तियों को लेकर उठे सवाल अब औपचारिक जांच के दायरे में आ गए हैं। आने वाले दिनों में समिति की रिपोर्ट से यह तय होगा कि आरोप कितने प्रमाणिक हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।


