पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लंबे समय से अस्थायी, अनुबंध या आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने स्पष्ट किया कि राज्य एक “संवैधानिक नियोक्ता” है और वित्तीय बाधाओं, पदों की कमी या अन्य फैसलों को बहाना बनाकर कर्मचारियों का वर्षों तक शोषण नहीं कर सकता।
याचिकाकर्ता जगदीश कुमार और अन्य ने बताया कि वे 1996 से नगर निगम राजपुरा में चपरासी के पद पर कार्यरत थे। उनकी सेवाएं 2003 में समाप्त कर दी गई थीं। हालांकि 2013 में श्रम न्यायालय, पटियाला ने एक याचिकाकर्ता को सेवा में बहाली का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें समय-समय पर अनुबंध के आधार पर काम दिया जाता रहा, लेकिन नियमितीकरण नहीं हुआ।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पंजाब सरकार ने 2016 में पंजाब एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट, डेली वेज, टेंपरेरी, वर्क चार्ज एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के कल्याण अधिनियम को लागू किया था। इस अधिनियम के तहत तीन साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों का नियमितीकरण अनिवार्य था। नगर निगम राजपुरा ने इस कानून को अपनाने का प्रस्ताव पारित किया और सरकार ने इसे स्वीकृति भी दी, बावजूद इसके याचिकाकर्ताओं की सेवाएं नियमित नहीं की गईं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हित में राज्य को नियमितीकरण के प्रावधानों को लागू करना आवश्यक है और किसी भी तरह की अनियमितता को अनुमति नहीं दी जाएगी।

