भारत–श्रीलंका सांस्कृतिक सेतु: दो युवकों की 6,000 किमी साइकिल यात्रा सारनाथ में संपन्न
भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से श्रीलंका के दो युवकों—नोवन कुमार और सुगत पतिरन—ने साइकिल से लगभग 6,000 किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा पूरी की। यह यात्रा मंगलवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में संपन्न हुई, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने पारंपरिक रीति से उनका स्वागत किया।
दोनों युवकों ने 25 अक्टूबर 2025 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। कोलंबो से जाफना पहुंचने के बाद उन्होंने जलमार्ग से तमिलनाडु के नागपट्टनम तक सफर किया। इसके बाद साइकिल से भारत के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए उन्होंने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार की यात्रा की और फिर नेपाल के लुम्बिनी होते हुए उत्तर प्रदेश में सारनाथ पहुंचे।
सारनाथ पहुंचने पर जम्बूद्वीप श्रीलंका बौद्ध विहार में प्रभारी भिक्षु के. सिरी सुमेध थेरो ने दोनों युवकों को खाता पहनाकर सम्मानित किया। स्वागत समारोह के बाद उन्होंने बौद्ध मंदिर में भगवान बुद्ध से अपने उज्ज्वल भविष्य और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।
नोवन कुमार और सुगत पतिरन ने बताया कि उनकी यह यात्रा केवल शारीरिक चुनौती नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म की साझा विरासत, अहिंसा, करुणा और शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक संबंधों की जड़ें बौद्ध परंपरा में गहराई से जुड़ी हैं और यह यात्रा उसी आध्यात्मिक सेतु को और मजबूत करने का प्रतीक है।
स्थानीय बौद्ध समुदाय और श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारत–श्रीलंका मैत्री और सांस्कृतिक संवाद का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

