पलामू में आत्मरक्षा हथियारों की पसंद बदली, रिवाल्वर की ओर बढ़ रहा रुझान

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पलामू जिले में आत्मरक्षा के लिए रखे जाने वाले लाइसेंसी हथियारों की पसंद में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले तक दो नाली बंदूक और रायफल का वर्चस्व रहा, वहीं अब रिवाल्वर लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल लाइसेंसधारियों में से करीब 45 प्रतिशत (लगभग 360 लोग) रिवाल्वर रखते हैं, जबकि करीब 55 प्रतिशत लाइसेंसधारी अब भी दो नाली बंदूक और रायफल का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, हथियार कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह अंतर आने वाले समय में और कम हो सकता है।

विदेशी हथियारों की बढ़ती मांग

सूत्रों के अनुसार, हथियारों की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और बेहतर डिजाइन के चलते विदेशी हथियारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इंग्लैंड, फ्रांस, इटली और जर्मनी में निर्मित हथियार लाइसेंसधारियों की प्राथमिक पसंद बनते जा रहे हैं।

खासतौर पर इंग्लैंड में बनी दो नाली बंदूक का वजन भारतीय बंदूकों की तुलना में काफी हल्का होता है, जिससे इसकी मांग अब भी बनी हुई है। हल्का वजन, संतुलन और बेहतर फायरिंग मैकेनिज्म इसे आत्मरक्षा के लिए उपयोगी बनाता है।

पुराने हथियार बेचकर रिवाल्वर की ओर शिफ्ट

हथियार कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कई लाइसेंसधारी अपनी पुरानी दो नाली बंदूक और रायफल बेचकर रिवाल्वर खरीद रहे हैं। हालांकि, पिस्टल की तुलना में रिवाल्वर की लाइसेंस प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होने के कारण लोगों का झुकाव उसी ओर अधिक है।

कारोबारियों ने यह भी बताया कि पिस्टल के लिए लाइसेंस प्रक्रिया जटिल होने के कारण उसका चलन सीमित है। वहीं, पुराने हथियार दुकानदारों द्वारा नहीं खरीदे जाने की स्थिति में लाइसेंसधारियों को या तो उन्हें अपने पास रखना पड़ता है या फिर संबंधित थाना में जमा कराना अनिवार्य हो जाता है।

सुरक्षा और सुविधा दोनों कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मरक्षा के लिए हथियार चुनते समय अब लोग सुरक्षा के साथ-साथ सुविधा, वजन और रखरखाव जैसे पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं। इसी वजह से पलामू जिले में हथियारों के चयन का ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है।

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