इंदौर में दूषित पेयजल से स्वास्थ्य आपदा, 3200 से अधिक बीमार, मौतों के आंकड़ों पर विवाद

2.9kViews
1959 Shares

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त की महामारी जैसी स्थिति बन गई है। राज्य में यह पहला मामला माना जा रहा है, जब किसी सीमित क्षेत्र में बेहद कम समय के भीतर इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही बीमारी की चपेट में आए हों। हालात इतने गंभीर हैं कि पूरा इलाका इस समय एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है।

अब तक 3200 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। कई परिवारों में स्थिति यह है कि घर के सभी सदस्य बीमार पड़ चुके हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक मरीजों की भीड़ उमड़ रही है, जिससे चिकित्सा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है।

पेयजल लाइन में सीवेज मिलने से फैला संक्रमण

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में सप्लाई की जा रही पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के चलते सीवेज का गंदा पानी मिल गया। इसी दूषित पानी के सेवन से फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया जैसे खतरनाक जीवाणु पानी में पहुंच गए, जिसने डायरिया और उल्टी-दस्त के प्रकोप को तेजी से फैला दिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी सीधे तौर पर गंभीर जलजनित बीमारियों का संकेत होती है और बच्चों व बुजुर्गों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

मौतों के आंकड़ों पर टकराव

इस मामले में मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर विवाद सामने आया है। सरकारी तौर पर 6 से 7 मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय लोगों और कुछ रिपोर्ट्स में 15 से 17 मौतों का दावा किया जा रहा है। इन कथित मौतों में एक छह महीने के मासूम बच्चे की मौत भी शामिल बताई जा रही है, जिसने इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल

घटना के बाद नगर निगम, जल प्रदाय विभाग और स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत और जल गुणवत्ता की जांच नहीं की गई, जिसके चलते हालात बेकाबू हो गए।

फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है, टैंकरों के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचाया जा रहा है और मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। हालांकि, हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।

यह घटना न केवल शहरी बुनियादी ढांचे की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पेयजल सुरक्षा में थोड़ी सी लापरवाही किस तरह बड़े जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *