प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित प्रयासों का असर बीते एक दशक में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। सरकारी आकलन और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफल रहे हैं, जिससे देश की एक बड़ी आबादी का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।
इस बदलाव में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डीबीटी के माध्यम से पिछले नौ वर्षों में लगभग 28 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए गए, जिससे लीकेज कम हुई और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार वर्ष 2026 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के और विस्तार की तैयारी कर रही है, जिससे गरीब और वंचित वर्गों को अतिरिक्त संरक्षण मिल सके।
ग्रामीण और शहरी गरीबी में समान रूप से कमी
विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अत्यधिक गरीबी में आई तेज गिरावट ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह उपलब्धि भारत सरकार की समावेशी विकास (Inclusive Growth) की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां आर्थिक प्रगति के लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित सब्सिडी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और डिजिटल भुगतान तंत्र ने गरीबी उन्मूलन की रफ्तार को तेज किया है, जिसका दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर पड़ेगा।

