पीएम विद्यालक्ष्मी योजना पर बैंकों की उदासीनता, छात्रों का लोन अप्रूव होने के बाद भी अकाउंट में नहीं आये पैसे

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केंद्र सरकार की ओर से छात्रों की उच्च शिक्षा को पूरा करने के लिए आसान और किफायती लोन उपलब्ध करवाने के लिए पीएम विद्यालक्ष्मी योजना चलाई जा रही है। लेकिन अब इस योजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। संसद में हुए सवाल जवाब में मिली जानकारी के मुताबिक इस योजना के तहत निजी बैंकों के साथ ही सरकारी बैंक भी उदासीनता दिखा रहे हैं जिससे कि इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी दर्ज की गई है।

लोन अप्रूव होने के बाद भी अकाउंट में पैसे नहीं

संसद से मिली डिटेल के मुताबिक कई ऐसी बैंक हैं जिन्होंने छात्रों का लोन अप्रूव तो कर दिया लेकिन उनके अकाउंट में उस ऋण के पैसे कभी भेजे ही नहीं गए। संसद में साझा की गई डिटेल के मुताबिक इस योजना के लिए कुल 30443 आवेदन बैंकों द्वारा मंजूर किये गए लेकिन इसमें से केवल 21,967 छात्रों को ही लोन मिल सका। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी बैंकों में 7823 आवेदन यानी 14% आवेदन बैंक स्तर पर लंबित है जिनमें 882 करोड़ रुपए की राशि अटकी है।

क्या कह रहा डाटा?

राज्यसभा की शिक्षा संबंधी समिति की ताजा रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि 25 फरवरी से 31 अगस्त के बीच 6 महीने में 55,887 आवेदन लोन के लिए प्राप्त हुए जिसमें 4,427 करोड़ रुपये लोन स्वीकार तो किया गया लेकिन छात्रों को सिर्फ 688.72 करोड़ रुपये ही आवंटित हुआ। इस हिसाब से लोन देने की दर केवल 15 फीसदी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले मिले, जहां बैंक ने लोन मंजूर तो किया, लेकिन आगे पैसा जारी नहीं किया।

सरकारी के साथ ही निजी बैंक भी दिखा रहे उदासीनता

पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर आए आवेदनों में कई निजी बैंकों एचडीएफसी, आईसीआईसीआई व एक्सिस बैंक ने एक भी लोन स्वीकृत नहीं किया। समिति ने इसे ‘उदासीनता और असहयोग’ बताया। ग्रामीण व कॉपरेटिव बैंक भी छात्रों को लोन देने में दिलचस्पी नहीं ले रहे। कई राज्य तो ऐसे हैं जहां बैंकों के एक भी छात्रों को लोन नहीं दिया है।
सरकारी बैंकों में स्टेट बैंक, पीएनबी, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा छात्रों को लोन दिया लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी बैंकों में 7823 आवेदन यानी 14% आवेदन बैंक स्तर पर लंबित है जिनमें 882 करोड़ रुपए की राशि अटकी है।

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