परिवहन सुविधा के अभाव में थम गया रेवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार, अब रेपिड मेट्रो से आस

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राष्ट्रीय राजधानी के समीप होने और दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित जिले के बावल व धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र न केवल प्रदेश बल्कि देश विशेष पहचान रखते हैं। छोटी-बड़ी 700 से अधिक कंपनियों हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नीमराणा व खुशखेड़ा क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती है। बावल के साथ इन दोनों क्षेत्रों में उद्यमी जा रहे हैं, पिछले वर्ष यहां पर नई इकाईयों का आगमन नहीं हुआ है। इसके अलावा दर्जनों इकाईयों के गेट पर ताले लटक गए हैं। सैकड़ों युवा बेरोजगार हो गए हैं। हालांकि रेपिड मेट्रो का बावल तक विस्तार होने से यहां नए उद्योगों के आने की उम्मीदें हैं। इस प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

बता दें कि बावल को आइएमटी का दर्जा मिलने के बाद सरकार ने यहां पर लगभग 1600 एकड़ क्षेत्र में मल्टी लाजिस्टिक हब विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू किया था लेकिन यहां के किसानों के विरोध बाद इसे रद कर दिया था।

अधिग्रहण के रद होने के बाद बावल औद्योगिक क्षेत्र में निवेश पर काफी अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसकी वजह से यहां पर किसी भी बड़े औद्योगिक घराने की ओर से निवेश नहीं किया गया है। इक्का-दुक्का इकाईयों ने निवेश किया है, लेकिन मल्टीनेशनल स्तर की एक भी कंपनी नहीं है। उधर, राजस्थान के नीमराणा व खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार काफी तेजी से हो रही है जो कि बावल के लिए चुनौती बना हुआ है।

मेट्रो परियोजना से उद्योग विस्तार को लगेंगे पंख

रेपिड मेट्रो परियोजना को बावल क्षेत्र तक बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए गए है। बावल औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा के मुकाबले विस्तार और आबादी में कहीं ज्यादा फैला हुआ है। धारूहेड़ा व बावल के बीच इस परियोजना का दूरी 20 किमी है। यानी मैट्रो का सफर इन दो औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने में पांच मिनट से भी कम समय लेगा।

बावल-रेवाड़ी-धारूहेड़ा से हजारों विद्यार्थी गुरुग्राम व दिल्ली-नोएडा में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लोग कंपनियों में कार्यरत हैं, जो सड़क मार्ग से गंतव्य जाते हैं। इसलिए यह परियोजना औद्योगिक विस्तार को नया आकार देगी। बावल में मुख्यत: आटो पार्ट्स इकाईयों की अधिक रुचि रही है।

बावल की ज्यादातर इकाइयां मानेसर, धारूहेड़ा, खुशखेड़ा व नीमराणा में मौजूद वाहन निर्माता कंपनियों को पार्ट्स उपलब्ध कराती है। यदि गंभीरता से प्रयास हो तो बावल आटो पार्ट्स कंपनियों के लिए हब बन सकता है।

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