आर्किटेक्ट ऑफ इकोनॉमी… पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कैसे बदल दी थी भारत की तकदीर, पढ़ें फैक्ट्स

1538 Shares

 पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि पर शुक्रवार (26 दिसंबर, 2025) को कांग्रेस नेताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने कहा कि उनकी विनम्रता, ईमानदारी और ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

डॉ. मनमोहन सिंह की सादगी और मौन रहने की शैली ने राजनीतिक जगत में एक अलग छाप छोड़ी है। ‘हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी।’ ये शब्द डॉ. सिंह के थे, जो विपक्षी दलों द्वारा उनकी चुप्पी पर उठाए जाने वाले असंख्य सवालों का जवाब देते थे।

डॉ. सिंह का आर्थिक सुधारों में अहम योगदान

डॉ. सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। वे मूल रूप से अर्थशास्त्री थे और राजनीति में आने से पहले उनका इससे कोई विशेष संबंध नहीं था। उन्होंने 1991 से लगातार पांच बार असम से राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने जाने का गौरव प्राप्त किया, जिसमें उनका 10 वर्षीय प्रधानमंत्री कार्यकाल भी शामिल है।

इससे पहले, वे पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री के पद पर रहे और 1982 से 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी बने। पिछले साल 92 की उम्र में दुनिया से विदा होने वाले डॉ. सिंह ने देश की आर्थिक दिशा को नया मोड़ दिया।

डॉ. मनमोहन सिंह के जीवन से जुड़े अनजाने तथ्य

  1. मनमोहन सिंह भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे, जिनका निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ।
  2. पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद वे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चौथे प्रधानमंत्री बने थे।
  3. डॉ. सिंह ने 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया और देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाया।
  4. मनमोहन सिंह को कई कार्डियक बाईपास सर्जरी का सामना करना पड़ा, जिसने उनकी राजनीतिक सक्रियता को प्रभावित किया।
  5. मनमोहन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के पक्षधर थे। उनके नेतृत्व में भारत ने अफगानिस्तान को स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, बुनियादी ढांचा और रक्षा विकास के लिए सहायता बढ़ाई, जिससे भारत अफगानिस्तान की मदद करने वाले प्रमुख देशों में शुमार हुआ।
  6. उनके चुनौतीपूर्ण राजनीतिक जीवन को दर्शाती कई फिल्में बनीं, जैसे ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ और ‘प्रधान मंत्री’।
  7. जुलाई 2005 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ की उपाधि प्रदान की, जबकि अक्टूबर 2006 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने भी यही सम्मान दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *