रामलला के धाम में समर्थ भारत के लिए तैयार हो रही भावभूमि,63 हजार परिवारों में पहुंचे स्वयंसेवक

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 विगत सौ वर्ष से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना देख रहा है। इस दिशा में तय कार्यक्रम क्रियान्वित होते रहे। जातियाें में बंटे समाज को एकजुट करने के लिए निरंतर होमवर्क चलता रहा। अब स्थापना के शताब्दी वर्ष पर स्वयंसेवक समर्थ भारत के सृजन के प्रयास में जुटे हैं। इसी क्रम में यहां लगभग 63 हजार परिवारों में स्वयंसेवक पहुंचे और उन्हें भारत माता का चित्र व साहित्य भेंट किया।

दरअसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस अवसर पर देश को परम वैभव तक ले जाने का लक्ष्य तय है। इसमें भाषा व जाति विभेद दूर करने का संकल्प लोगों को दिलाया जा रहा है। इस दिशा में रामनगरी से भी संघ बड़ा संदेश दे रहा है।

राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत भी सिख समुदाय के लोगों से मिले तो प्रांत प्रचारक कौशल निरंतर यहां स्थित विभिन्न जातियों के मंदिरों में जाकर संत महंतों के बीच संघ की सौ वर्ष की यात्रा के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

उन्होंने संघ के कार्यों के बारे में भी लोगों को बताया। समर्थ भारत के सृजन सभी को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। इन दिनों अयोध्याधाम की गलियाें में संस्कृति, संस्कार व कर्तव्यबोध की समझ विकसित कर देश को आगे बढ़ाने की कोशिश भी ध्वनित हो रही है। अयोध्या महानगर में 360 व जिले में 150 सदस्यों की टोली इस जागरूकता अभियान हिस्सा है।

जिले में खंड व शहरों में बस्ती स्तर पर सामाजिक परिवर्तन की कोशिश स्वयं सेवक कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य अशोक बेरी ने अविवि के प्रो. केके वर्मा सहित कई विशिष्टजनों से मिलकर उन्हें इस जागरूकता अभियान से जोड़ा।

महानगर सह कार्यवाह राहुल सिंह भी साथ रहे। प्रांत सह संपर्क प्रमुख प्रो. शिव कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य, विशेष व अतिविशिष्ट श्रेणी के लोगों से संपर्क कर पंच परिवर्तन के बारे में बताया जा रहा है। इसी उद्देश्य को लेकर अब तक संघ ने दो अभियान संचालित किए व निचले स्तर पर सामाजिक सद्भाव की बैठकें हुईं।

पहले बस्ती स्तर पर स्वयंसेवकों ने पथ संचलन निकाला। अब घर-घर संपर्क कर पत्रक बांटा जा रहा है। यह अभियान 21 दिसंबर तक चलेगा। महानगर के 15 नगरों की 91 बस्ती में 900 से अधिक कार्यकर्ता सघन संपर्क कर रहे हैं।

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