खबरदार! पीलीभीत में रेलवे ट्रैक बना पिकनिक स्पॉट, मासूमों से लेकर बुजुर्गों तक सब दांव पर लगा रहे जान

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 पड़ोस के जनपद शाहजहांपुर में बुधवार रात रेलवे ट्रैक पर हुई पांच मृत्यु की चीखें शायद पीलीभीत के लोगों तक नहीं पहुंची हैं। तभी तो सुरक्षा के तमाम दावों और रेलवे पुलिस की गश्त को ठेंगा दिखाते हुए नौगवां और बरहा फाटक के आसपास का रेलवे ट्रैक अब स्टंट ग्राउंड और पिकनिक स्पाट बन गया है। बुधवार को जागरण की टीम ने जब इन पटरियों का जायजा लिया, तो मंज़र रूह कंपा देने वाला था। यहां मासूम बच्चों से लेकर लाठी के सहारे चलने वाले दिव्यांग तक, हर कोई रेल की पटरियों को अपनी जागीर समझकर जान जोखिम में डाल रहा है।

मासूमों की खतरनाक पतंग उड़ान

नौगवां फाटक से महज़ 100 मीटर की दूरी पर ईदगाह की ओर का दृश्य सबसे डरावना था। यहां लगभग तीन बच्चे, इनकी उम्र खेल-कूद की है, रेलवे ट्रैक के बिल्कुल बीचों-बीच खड़े होकर पतंग उड़ा रहे थे। पतंग की डोर थामे ये बच्चे पीछे से आती ट्रेन की आहट सुनने की स्थिति में भी नहीं थे। उनका पूरा ध्यान आकाश में कटती पतंग पर था, जबकि उनके पैरों के नीचे बिछी पटरियां किसी भी वक्त काल बन सकती थीं।

इंजन के आगे फिल्मी स्टंट

रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ने पर लापरवाही की एक और इंतहा दिखी। ट्रैक पर तीन युवक बैठे थे, इनमें से एक हाथ में फोन थामे ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर बात कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि उनसे महज़ 300 मीटर की दूरी पर रेल का इंजन आ रहा था। युवक ट्रैक से हटने के बजाय फिल्मी स्टाइल में वहीं टहलता रहा, मानों उसे अपनी जान की कोई फिक्र ही न हो। उसके साथ बैठे दो अन्य साथी भी उसे रोकने के बजाय मूकदर्शक बने रहे।

लाचारी और जल्दबाजी का जोखिम

बरहा फाटक का नज़ारा और भी विचलित करने वाला था। फाटक बंद होने के बावजूद साइकिल सवार जान जोखिम में डालकर बंद गेट होने पर निकल रहा था। उसे यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ट्रेन आने पर काल के गाल में समा सकता था। हालांकि यह पहली बार नहीं बल्कि कई बार देखने को मिलता है। कि लोग फटक बंद होने पर बाइक और साइकिल को नीचे से निकालते दिखे जाते है।

पैर से दिव्यांग, चल रहे ट्रक पर

नौगवां फाटक पर फ्लाई ओवर के साथ अंडर पास का निर्माण इस लिए कराया गया कि राहगीरों को आवागमन के परेशानी नहीं हो। लेकिन उसके बाद भी लोग ट्रक पर रफ्तार भर रहे है। एक बुजुर्ग व्यक्ति जो हाथ में लाठी लिए था और पैर से लाचार चल रहा था, वह भी मुख्य सड़क के बजाय रेलवे ट्रैक के पत्थरों पर चलना सुरक्षित समझ रहा था। ट्रेन आने की स्थिति में ऐसे लाचार व्यक्ति का वहां से हट पाना नामुमकिन है।

अपने साथ बच्चे की दांव पर जिंदगी

प्रशासनिक सुस्ती पर बड़े सवाल रेलवे ट्रैक पर इस कदर बढ़ती भीड़ और अनाधिकृत रूप से लोगों का घूमना आरपीएफ और जीआरपी की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है। बुधवार को टनकपुर की ओर से आई ट्रेन से महिला प्लेटफार्म की ओर उतरे के बजाय गलत दिशा में उतर गई। महिला इतनी लापरवाह थी उसने अपनी जिंदगी के साथ अपने बच्चे की भी जिंदगी दांव पर लगा दी। वह ट्रक पर बच्चे को गोदी लेकर दौड़ गई।

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