गुलनी गांव विकास के नक्शे से गायब, योजनाएं कागजों में कैद

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रामगढ़ चौक प्रखंड मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर तेतरहाट पंचायत का गुलनी गांव (वार्ड संख्या 1, 2 व 3) विकास के तमाम दावों की पोल खोल रहा है। लगभग 600 घरों वाले इस गांव में 1,400 मतदाता हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। नल-जल योजना का हाल यह है कि केवल करीब 100 घरों में ही पानी पहुंच रहा है, जबकि शेष 500 घर पीएचईडी विभाग के भरोसे हैं।

गली-गली बिछे पाइप घटिया और जर्जर होकर बेकार साबित हो रहे हैं, लेकिन न जनप्रतिनिधियों को चिंता है और न ही विभागीय अधिकारियों को। गांव में एक भी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) केंद्र नहीं है। कार्डधारियों को तीन किलोमीटर दूर तेतरहाट बाजार से राशन लाना पड़ता है। शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव में आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की सुविधा है, इसके बाद छात्रों को मैट्रिक के लिए तेतरहाट बाजार जाना पड़ता है।

तीनों वार्ड में एक भी स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है, मजबूरन ग्रामीणों को तेतरहाट हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर या लखीसराय सदर अस्पताल का रुख करना पड़ता है। गांव के तीन सरकारी तालाबों में से दो पर अतिक्रमण कर मिट्टी भर दी गई है। एकमात्र बचा तालाब भी बिना सुंदरीकरण के उपेक्षा का शिकार है। दो समुदायों के लोग इस गांव में रहते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी सभी के लिए समान परेशानी बन चुकी है।

क्या बोलीं मुखिया?

तेतरहाट पंचायत की मुखिया रामवती देवी ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पंचायतवासियों को दिया जा रहा है और जहां भी समस्या आती है, उसका समाधान किया जा रहा है। समस्याएं हैं लेकिन प्राथमिकता तय करके उसे दूर किया रहा है। यह भी सच है यह पंचायत प्रशासनिक स्तर पर उपेक्षित है। बावजूद मेरी ओर से प्रयास जारी हैं।

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