लोगों की सेहत से खिलवाड़ पर मानवाधिकार गंभीर, चंडीगढ़ में दूध-पनीर का इस्तेमाल करने से पहले पढ़ लें यह खबर

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 शहर में बिक रहे मिलावटी दूध-पनीर का मुद्दा अब गंभीर हो चुका है। लोगों की सेहत से खिलावड़ पर मानवाधिकार की चिंता बढ़ा दी है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथाॅरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की रिपोर्ट के अनुसार बीते तीन वर्षों में लिए गया दूध और दुग्ध उत्पाद का लगभग हर तीसरा सैंपल फेल पाया गया है। इस रिपोर्ट के बाद पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग हरकत में आ गया है।

आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी की पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब-तलब करते हुए कमिश्नर ऑफ फूड सेफ्टी, हेल्थ सेक्रेटरी और डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही फूड सेफ्टी ऑफिसर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। आदेश की प्रति संबंधित विभागों को ई-मेल और डाक से भेजी जा चुकी है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2026 को होगी। सुनवाई से एक सप्ताह पहले पर अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।

पनीर में स्टाॅर्च और सुक्रोज जैसी मिलावट सबसे अधिक पाई गई

एफएसएसएआइ की रिपोर्ट के मुताबिक मानकों के अनुसार पनीर में स्टाॅर्च और सुक्रोज जैसी मिलावट सबसे अधिक पाई जा रही है। वर्ष 2022-23 में चंडीगढ़ से 23 सैंपल लिए गए, जिनमें 6 फेल पाए गए। 2023-24 में 40 सैंपलों में से 17 गैर-मानक निकले, जबकि 2024-25 में अब तक 36 सैंपलों में से 19 फेल हो चुके हैं।

बाहरी राज्यों से आने वाली सप्लाई पर निगरानी बढ़ाना जरूरी

यानी लगभग हर तीसरा सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बाजार वाले चंडीगढ़ में भी फेल सैंपलों का अनुपात चिंता का विषय है। यह सप्लाई चेन में खामियों का संकेत देता है और बाहरी राज्यों से आने वाले दूध-पनीर पर सख्त निगरानी जरूरी है।

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