इंसानों के खतरा बने ऐसा एआई नहीं बनाएगी माइक्रोसॉफ्ट, ह्यूमनिस्ट सुपरइंटेलिजेंस पर है कंपनी का फोकस

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दुनिया की बड़ी और टेक्नोलॉजी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एडवांस बनाने की होड़ लगी है। ऐसे में माइक्रोसॉफ्ट का रुख हैरान करने वाला है। माइक्रोसॉफ्ट एआई के सीईओ मुस्तफा सुलेमान का कहना है कि अगर कोई एआई सिस्टम इंसानों के नियंत्रण से बाहर जाने लगा तो माइक्रोसॉफ्ट ऐसे सिस्टम को बीच में छोड़ देगा और उसे डेवलप नहीं करेगा।

ह्यूमनिस्ट सुपरइंटेलिजेंस की है जरूरत

मुस्तफा सुलेमान कहते हैं कि एआई के मामले में हमें ह्यूमनिस्ट सुपरइंटेलिजेंस की जरूरत है। यानी ऐसा एआई सिस्टम होना चाहिए जो सिर्फ इंसानों की मदद करें। इसके साथ ही एआई अपने लक्ष्य खुद से तय न करें। इसके साथ ही उनका मानना है कि एआई अपने फैसलों से इंसानी नियंत्रण को भी चुनौती न दे। उनका यह कहना था कि सिक्योरिटी और इंसानों के साथ तालमेल बैठाए बिना किसी भी सुपर एआई को लॉन्च नहीं किया जाना चाहिए।

मुस्तफा ने यह बयान ऐसे वक्त पर दिया है जब ओपनएआई के साथ पार्टनरशिप के बावजूद माइक्रोसॉफ्ट खुद का एआई सिस्टम डेवलप कर रहा है। कंपनी को इसके लिए खुली छूट मिली है और वह अपनी सुपर इंटेलिजेंस टीम बना रही है। यह टीम एआई को लेकर भविष्य की टेक्नोलॉजी पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि अगले 5 से 10 सालों में ऐसे एआई सामने आएंगे जो खुद फैसला ले सकेंगे। यह इंसानों के लिए बड़ा खतरा हो सकते हैं।

मेडिकल एआई पर माइक्रोसॉफ्ट का फोकस

माइक्रोसॉफ्ट एआई की प्लानिंग को लेकर उन्होंने बताया कि कंपनी मेडिकल एआई पर काम कर रही है। वे ऐसा एआई सिस्टम बना रहे हैं जो गंभीर और दुर्लभ बीमारियों की आसानी से पहचान कर सके। इसके जरिए कंपनी स्वास्थ्य पर होने पर खर्च को कम कर सकती है। इसके साथ ही उनका कहना था कि आने वाले 20 से 30 सालों में एआई कई नौकरियों को रिप्लेस कर देगा। ऐसे में सरकारों को यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे उपायों के बारे में सोचना पड़ेगा ताकि लोग सुरक्षित रह सके।

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