प्रोजेक्ट गुड में उत्तर बिहार का दबदबा, मुजफ्फरपुर अव्वल और तीसरे स्थान पर समस्तीपुर

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प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम (सीखने की एक विधि, जिसमें छात्र प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सीखते हैं) में समस्तीपुर को राज्य में तीसरा स्थान मिला है। मुजफ्फरपुर अव्वल और दूसरे स्थान पर कैमूर है। समस्तीपुर के 990 विद्यालयों में 873 के प्रोजेक्ट गुड आए हैं।

राज्य स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 908 विद्यालयों ने प्रोजेक्ट में साक्ष्य के साथ पूर्ण करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना ने पांच दिसंबर को जारी की है। यह सफलता शिक्षकों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि विद्यार्थियों में विज्ञानी दृष्टिकोण और प्रयोगात्मक शिक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है।

राज्य के कुल 28 हजार 987 विद्यालयों में से 20 हजार 857 विद्यालयों ने परियोजना में भागीदारी दर्ज कराई है। जबकि, 18 हजार 802 विद्यालयों ने परियोजना काे पूर्ण किया और 18 हजार 75 विद्यालयों ने साक्ष्य अपलोड किया है।

मुजफ्फरपुर जिला सबसे आगे रहा। जहां कुल 1391 विद्यालयों में से 1346 विद्यालयों ने परियोजना में भाग लिया। इनमें से 1332 विद्यालयों ने परियोजना पूर्ण एवं 1276 ने साक्ष्य अपलोड किया। दूसरा स्थान कैमूर जिला ने प्राप्त किया है। यहां पर कुल 590 विद्यालयों में 94 फीसद ने प्रतिभाग किया, जबकि 93 फीसद ने प्रोजेक्ट पूर्ण किया है। वहीं 91 फीसद विद्यालयों का प्रोजेक्ट गुड रहा।

छात्रों को परियोजनाओं पर काम करने का अवसर:

प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पीबीएल कार्यक्रम के तहत छात्रों को गणित और विज्ञान विषय में कक्षा छह से आठ तक के पाठ्यपुस्तकों पर आधारित परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिल रहा है। इस कार्यक्रम में छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभवों के माध्यम से सीखने और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

छात्रों के सोच, समस्या व समाधान कौशल को बढ़ावा:

जिला शिक्षा समन्वयक अर्जुन कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम में विद्यालयों द्वारा शिक्षकों के सहयोग से बेहतर कार्य हुआ है। पीबीएल या प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग एक शिक्षण पद्धति है। जिसमें छात्र किसी जटिल समस्या या चुनौती की जांच और प्रतिक्रिया के माध्यम से सक्रिय रूप से सीखते हैं। यह छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभवों के माध्यम से ज्ञान और कौशल विकसित करने में मदद करता है। साथ ही संचार जैसे कौशल को बढ़ावा देता है। प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग एक शिक्षण पद्धति है, जिसमें समस्याओं को हल करने, प्रयोग करने और सीखने का अवसर दिया जाता है।

छात्रों में बढ़ती है आत्मविश्वास और प्रेरणा:

जिला तकनीकी सदस्य ऋतुराज जयसवाल ने बताया कि प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा रहा है। छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभवों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है। महत्वपूर्ण सोच, समस्या, समाधान, सह याेग और संचार जैसे कौशल विकसित होते हैं। छात्रों में आत्मविश्वास और प्रेरणा बढ़ती है। यह छात्रों को भविष्य की शिक्षा और करियर के लिए तैयार करता है। पीबीएल कार्यक्रम छात्रों के लिए एक मूल्यवान सीखने का अनुभव प्रदान कर रहा है। जिससे उन्हें न केवल ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है बल्कि महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी विकसित होते हैं।

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