12 साल बाद राजगीर महोत्सव में लौट रहे कैलाश खेर, बिखेरेंगे सुरों का जादू

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राजगीर महोत्सव को इस वर्ष और भी भव्य व यादगार बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 19 दिसंबर की शाम आयोजित महोत्सव में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक एवं सूफी संगीत के दिग्गज कलाकार कैलाश खेर अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। उनके आगमन की खबर से संगीत प्रेमियों में खासा उत्साह है।

गौरतलब हो कैलाश खेर इससे पहले दिसंबर 2013 में राजगीर महोत्सव में आए थे। उस समय उन्होंने मशहूर कवयित्री कविता सेठ के साथ मंच साझा कर यादगार प्रस्तुति दी थी, जिसे आज भी लोग नहीं भूल पाए हैं।

12 सालों के बाद वापसी

करीब 12 वर्षों बाद एक बार फिर उनका राजगीर आगमन संगीत प्रेमियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। इस बार वे नालंदा जिला प्रशासन के निमंत्रण पर ‘कैलासा’ नामक कार्यक्रम के तहत अपनी प्रस्तुति देने वाले हैं।

कैलाश खेर अपने सूफी और लोक संगीत से जुड़े गीतों के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखते हैं। तेरी दीवानी, अल्लाह के बंदे, सैयां, चक दे फट्टे जैसे लोकप्रिय गीतों के जरिए उन्होंने हर वर्ग के श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर में उनकी प्रस्तुति से महोत्सव का सांस्कृतिक माहौल और भी गहराने की उम्मीद है । राजगीर महोत्सव पहले से ही अपनी कला, संस्कृति और लोक विरासत के लिए जाना जाता है।

19 दिसंबर को होगा कार्यक्रम

ऐसे में कैलाश खेर की प्रस्तुति से सूफी संगीत का रंग पूरे महोत्सव में घुलने की पूरी संभावना है। आयोजन समिति का मानना है कि उनकी गायकी युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों और परिवारों को भी समान रूप से आकर्षित करेगी।

संगीत प्रेमियों का कहना है कि कैलाश खेर की लाइव प्रस्तुति सुनना अपने आप में एक अनूठा अनुभव होता है। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई और सूफी रंग श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराता है। यही वजह है कि 19 दिसंबर की शाम को लेकर दर्शकों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

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