जहानाबाद जिले में इस बार खरीफ से रबी की तैयारी का संतुलन बिगड़ता दिख रहा है। जिले में अब तक लगभग 85 प्रतिशत क्षेत्रों में ही धान की कटनी पूरी हो पाई है, जबकि 15 प्रतिशत खेतों में किसान अभी भी मौसम के अनुकूल होने का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में अत्यधिक नमी बनी रहने के कारण कटनी की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिसका सीधा असर रबी मौसम की सबसे प्रमुख फसल गेहूं पर दिखाई दे रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय मानकों के अनुसार, गेहूं की बुआई का आदर्श समय 15 दिसंबर तक माना जाता है। इस अवधि में बोई गई फसल की अंकुरण क्षमता बेहतर रहती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
लेकिन इस वर्ष धान की देर से कटनी और भूमि में नमी के कारण गेहूं की बुआई काफी प्रभावित हुई है। अभी तक जिले में मात्र 20 प्रतिशत क्षेत्रों में ही गेहूं की बुआई हो पाई है, जबकि अधिकांश किसान खेतों के सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि नमी के कारण खेतों में ट्रैक्टर चलाना मुश्किल हो रहा है। धान के ठूंठ भी पूरी तरह सूख नहीं पाए हैं, जिससे तैयारी में और अधिक समय लग रहा है।
यदि नमी कम नहीं हुई, तो गेहूं की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। देर से बोए गए गेहूं का उत्पादन हर वर्ष कम देखा जाता है, इसलिए किसान भी चिंतित हैं।
हालांकि दलहन और तिलहन जैसी रबी की अन्य फसलें इस स्थिति से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुई हैं। जिले में अब तक दलहन की लगभग 60 प्रतिशत और तिलहन की करीब 80 प्रतिशत बुआई पूरी हो चुकी है।
इसका मुख्य कारण यह है कि इन फसलों के लिए चुने गए खेत ऊंचे और कम नमी वाले थे, जिससे किसानों को सुविधा मिली।
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम फिलहाल गेहूं की बुआई के लिए पूरी तरह अनुकूल है और किसान दिसंबर महीने तक इसकी बुआई कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए गेहूं के बीज का 99 प्रतिशत वितरण हो चुका है, इसलिए बीज संकट की कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों में नमी कम होते ही बुआई शुरू करें और अनुशंसित तकनीक का पालन करें।
कुल मिलाकर, धान कटनी में हुई देरी ने रबी मौसम की शुरुआत की रफ्तार को धीमा जरूर किया है, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों में मौसम अनुकूल रहा, तो गेहूं की बुआई अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है।

