मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लाभार्थियों का चार बिंदुओं पर हो रहा सत्यापन, दुल्हन के मायके से लेकर ससुराल तक होगी जांच

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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से अब तक 858 नव युगल का विवाह कराया जा चुका है। इन लाभार्थियों का चार बिंदुओं पर सत्यापन शासन के निर्देश पर कराया जा रहा है। सत्यापन के लिए जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों के करीब बीस अधिकारियों को नामित किया है। यह अधिकारी दूल्हन के मायके से लेकर ससुराल तक पात्रता से लेकर मिले उपहार का सत्यापन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में जिले को लगभग दो हजार विवाह कराने का लक्ष्य मिला है। इसमें अब तक जिले पर 484, महोली में 147 व परसेंडी में 227 (कुल 858) नव युगल का विवाह कराया गया है। हर लाभार्थी पर सरकार ने एक-एक लाख रुपये खर्च किए हैं। कई ब्लाकों में विवाह कराने की तैयारियां चल रही हैं।

आवेदनकर्ताओं का समाज कल्याण विभाग अलग से सत्यापन कराया जा रहा है। समारोह में विवाह करने वाले लाभार्थियों की चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें अधिकारी दूल्हन के मायके से लेकर ससुराल तक जांच कर रहे हैं कि शादी के वह वास्तविक पात्र हैं। दोनों का हाईस्कूल की मार्कशीट से आयु का सत्यापन होगा। पूर्व से शादी-शुदा तो नहीं हैं। तलाकशुदा हैं तो पूर्व पति का विवरण देना होगा। नव युगल के विवाह के विषय में पड़ोस से भी पता किया जाएगा। विवाह में मिलने वाली उपहार सामग्री प्राप्त हो गई या नहीं, इसका भी सत्यापन होगा।

प्रति लाभार्थी एक लाख रुपये का खर्च

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में विवाह करने वाले नवयुगल पर सरकार एक लाख रुपये खर्च करती है। इसमें 60 हजार रुपये विवाहिता के खाते में दिए जाते हैं। वहीं 25 हजार रुपये का उपहार मिलता है। इसमें 24 तरह की सामग्री होती है। वहीं 15 हजार रुपये कार्यक्रम के आयोजन पर खर्च होते हैं।

फर्जीवाड़ा रोकने को चल रही जांच

सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन स्तर से जांच कराई जा रही है। पिछले वर्ष कुछ जिलों में ऐसे मामले पकड़े गए थे जो पूर्व से विवाहित थे। योजना का लाभ पाने के लिए विवाह किया था।

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