फ्रास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एफआइईएल) कंपनी के निदेशकों पर ठगी के गंभीर आरोप थे। जबकि राजेश रोथरा के विरुद्ध सीबीआइ लखनऊ में आठ मुकदमों में जांच चल रही थी। वह अपनी कंपनियाें फारईस्ट व गल्फ डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के माध्यम से फर्जी बिल उपलब्ध कराता था। बैंकों से विदेशी ऋण पत्र (एफएलसी) सीमा का लाभ उठाकर धोखाधड़ी की जाती थी। कंपनियों के बीच गलत तरीके से खरीद-बिक्री के लेनदेन दिखाए जाते थे।