‘तत्काल सीमांकन कर मुंडका के तालाबों को करें पुनर्जीवित’, एनजीटी ने डीडीए और डीएम को दिया आदेश

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 मुंडका गांव के तालाबों पर हुए अतिक्रमण हटाने से लेकर सीमांकन करने के पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। एनजीटी न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के स्पष्ट आदेश पहले के बावजूद भी सीमांकन व अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई।

एनजीटी ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) व जिलाधिकारी (पश्चिम) को आदेश दिया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर सभी तालाबों सीमांकन पूरा करें। साथ ही तलाबों पर अतिक्रमण करने वाले अतिक्रमणकारियों के नाम व पता से लेकर पूरा विवरण पेश करने का निर्देश दिया। डा. जीत सिंह यादव के आवेदन पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने डीडीए को छह सप्ताह में एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने कहा कि एक्शन प्लान में तालाबों के पुनर्जीवन के उपाय, बजट, कार्य आवंटन, समय-सीमा के साथ ही जिम्मेदार नोडल अधिकारी की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने इसके अलावा राज्य वेटलैंड प्राधिकरण (डीएसडब्ल्यूएलए) को छह सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने को कहा कि तालाबों के सीमांकन की स्थिति क्या है और विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही पर क्या कार्रवाई की गई।

यह भी पूछा है कि वेटलैंड नियम- 2017 के पालन की वास्तविक स्थिति क्या है। एनजीटी ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास (डीएसआइआइडीसी ) को जलाशय के पुनर्जीवन हेतु स्पष्ट और पठनीय एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही एनजीटी ने चेतावनी दी कि उक्त आदेशों का अनुपालन नहीं होने पर संबंधित प्राधिकारी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से एनजीटी के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। मामले पर अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी। आवेदनकर्ता ने वर्ष 2022 में आवेदन दाखिल कर मुंडका गांव स्थित 16 बीघा पांच बिस्वा क्षेत्रफल में फैले शिशु वाला तलाब पर हुए अतिक्रमण की समस्या उठाई थी। आवेदन में शिशुवाला के अलावा शंगुशहर, गुगा, जोहड़ी, गुहली तालाबों पर हुए अतिक्रमण को हटाने व तालाबों का सीमांकन करने की भी मांग की गई थी।

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