सफलता का सीक्रेट है विजुअलाइजेशन, समझें कैसे कल्पना करने की कला बदल सकती है आपका जीवन

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सपने देखना अक्सर इलॉजिकल मान लिया जाता है, लेकिन साइंस बताता है कि सही तरीके से की गई कल्पना हमारी सफलता की सबसे बड़ी साथी बन सकती है। इसे विजुअलाइजेशन (Visualization) कहा जाता है यानी किसी भी लक्ष्य को हासिल करने से पहले उसकी तस्वीर अपने मन में देखना।

एक्स्पर्ट की मानें, तो विजुअलाइजेशन हमारे दिमाग के साइबरनेटिक सिस्टम को एक्टिव करता है, जो हमें एक ऑटो-पायलट की तरह लक्ष्य की ओर ले जाता है (How to Visualize Success)। रिसर्च बताते हैं कि यह तकनीक परफॉर्मेंस में 20% तक सुधार ला सकती है। आइए, तीन अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के अनुभवों से समझते हैं कि यह मेंटल प्रैक्टिस कैसे जीवन बदल सकता है।

मैदान में जीत से पहले दिमाग में जीत

एनबीए के स्टार खिलाड़ी हैरिसन बार्न्स पिछले 14 सालों से लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते आए हैं। 2020 में जब उन्होंने अपने रिबाउंड औसत को बेहतर करने का लक्ष्य रखा, तो उनके कोच जो बॉयलन ने फिजिकल ट्रेनिंग के साथ विजुअलाइजेशन को उनकी रूटीन में शामिल किया।

बार्न्स रोज 10 मिनट एक खास ऑडियो सुनते, जिसमें ब्रीदिंग रिदम, कोर्ट की आवाजें, भीड़ की गूंज और मैच की स्थितियों की कल्पना शामिल थी। वे इसे मैच से पहले, लॉकर रूम में और सोने से ठीक पहले सुनते थे।

कुछ हफ्तों में उन्हें फर्क दिखने लगा। दिमाग और शरीर एक स्क्रिप्ट पर चल रहे थे, जिसके कारण 2021 में उनका रिबाउंड औसत करियर का सर्वश्रेष्ठ रहा।

कल्पना से बिजनेस एंपायर तक

अमेरिका की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल सारा ने बिना इंवेस्टमेंट और एक्सपीरिएंस के एक अरब डॉलर की कंपनी खड़ी की। वह अपनी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय विजुअलाइजेशन को देती हैं। सारा के पास अपने जीवन की बिल्कुल साफ तस्वीर थी, खुद का बिजनेस, अपने बनाए प्रोडक्ट्स, दुकान में सजे सामान और ग्राहकों के रिएक्शन।

यहां तक कि उन्होंने खुद को ओपरा विनफ्रे के शो में आमंत्रित होते भी कल्पना में देखा और यह सपना बाद में सच भी हुआ। 100 से ज्यादा रिजेक्शन के बावजूद वह सफलता की तस्वीर रोज देखती रहीं। यह मेंटल प्रैक्टिस उन्हें चुनौतियों में भी नए हल खोजने की ताकत देता रहा।

मुश्किलों को पहले से जी लेना

सफलता की कल्पना जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है मुश्किल वक्त की मेंटल प्रैक्टिस करना। अंतरिक्ष यात्री क्रिस हैडफील्ड कहते हैं, “असली हिम्मत डर को हटाने में नहीं, बल्कि उससे पहले ही निपटने की तैयारी में है।”

स्पेसवॉक के दौरान जब उनके सूट में खराबी आ गई और वे अचानक अंधेरे में चले गए, तब भी वे शांत रहे। क्योंकि उन्होंने पहले से सोचा था कि सबसे बुरा क्या हो सकता है और उससे कैसे निपटना है। उनकी मेंटल रिहर्सल ने मुसीबत की घड़ी में उन्हें संतुलित बनाए रखा।

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