11 जिलों में खेत जलाने की लपटें, 4,062 मामले दर्ज अगले 3 दिनों में और बढ़ सकते हैं फार्म फायर

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पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में बचे पुआल को जलाने की घटनाओं में रविवार को 440 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे राज्य में इस साल कुल फार्म फायर की संख्या 4,062 तक पहुंच गई। यह सिर्फ दो मामले कम हैं राज्य के अब तक के एक दिन में सबसे अधिक रिकॉर्ड (442) से।

मालवा क्षेत्र इस साल भी इस मामले में सबसे आगे रहा। कुल 377 घटनाएं इसी क्षेत्र से आईं। मोगा ने सबसे ज्यादा 52 मामले दर्ज किए, वहीं मानसा और फीरोजपुर में 50-50 मामले और सांगरुर में 49 मामले दर्ज किए गए। सांगरुर अब भी राज्य में सबसे अधिक मामलों के साथ 652 घटनाओं के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद तरनतारन 599 और फीरोजपुर 417 मामलों के साथ हैं।

हालांकि, इस साल कुल आंकड़े पिछले साल के मुकाबले कम हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में 6,266 घटनाएं हुई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर की शुरुआत में हुई बारिश ने धान की कटाई में देरी की, जिससे खेतों को साफ करने का समय सीमित हो गया और किसान समय पर गेहूं की बुवाई के लिए पुआल जलाने को मजबूर हुए।

राज्य सरकार और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की लगातार जागरूकता और निगरानी के बावजूद भी स्टॉबल जलाना पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है। अधिकारी अनुमान लगा रहे हैं कि जैसे-जैसे बुवाई का काम तेजी से पूरा होगा, अगले 72 घंटों में घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है।

शीर्ष पांच जिलों की स्थिति:
सांगरुर: 652
तरनतारन: 599
फीरोजपुर: 417
अमृतसर: 295
बठिंडा: 278

पंजाब में हर साल अक्टूबर के मध्य से फार्म फायर की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जाती है, लेकिन इस बार कटाई में देरी के कारण पीक थोड़ा पीछे खिसका है। अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद यह समस्या लगातार जारी है, जो वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।

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