सावधान! ज़्यादा एंटीबायोटिक खाने वालों पर मंडरा रहा इस नई बीमारी का खतरा, अब जरा संभल जाइए

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अगर आप हर छोटे-मोटे सिर दर्द, खांसी या जुकाम में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ले लेते हैं खासकर एंटीबायोटिक (Antibiotic) तो अब सावधान हो जाइए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह लापरवाही भारत में एक बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रही है जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) कहा जाता है। इस स्थिति में संक्रमण (Infection) पर दवाएं असर करना बंद कर देती हैं जिससे आम बीमारियों का इलाज भी मुश्किल होता जा रहा है।

भारत में सबसे बड़ा खतरा: चौंकाने वाली WHO रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट में इस खतरे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर हर 6 में से 1 बैक्टीरियल इन्फेक्शन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) पाया गया। यह समस्या मूत्र मार्ग (Urinary Tract) और ब्लड फ्लो (Blood Flow) में इन्फेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं में सबसे ज्यादा देखी गई है। ग्लोबल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सर्विलांस रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत सहित दक्षिण पूर्वी एशिया के क्षेत्र में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की दर सबसे अधिक है। भारत में ब्लड फ्लो इन्फेक्शन के 70% और ई. कोलाई (E. coli) इन्फेक्शन के 78% से अधिक मामले एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी पाए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि इन पर आम दवाएं काम नहीं कर रही हैं।

क्यों बढ़ रहा है यह खतरा?

विशेषज्ञों ने इस गंभीर स्थिति के लिए दो मुख्य कारण बताए हैं:

  1. अधूरा कोर्स और सेल्फ मेडिकेशन: लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं और जैसे ही बेहतर महसूस करते हैं दवा का कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं।
  2. बैक्टीरिया पर असर: एंटीबायोटिक केवल हानिकारक बैक्टीरिया को ही नहीं बल्कि फायदेमंद बैक्टीरिया को भी मारती हैं। जब दवा का कोर्स अधूरा छूटता है तो शरीर में ऐसे हानिकारक जीवाणु बच जाते हैं जो धीरे-धीरे प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) हो जाते हैं और किसी भी दवा से खत्म नहीं होते।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो एक सामान्य वायरल इन्फेक्शन भी गंभीर रूप ले सकता है जिससे मरीजों को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है और इलाज का खर्च भी बढ़ेगा।

क्या करें और क्या न करें: बचाव ही सबसे बड़ा इलाज

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि अभी सही कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले सालों में और खतरनाक हो सकती है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से बचने के लिए इन बातों का पालन करना आवश्यक है:

 

क्या करें (Do’s)                                              क्या न करें (Don’ts)      

डॉक्टर की सलाह पर ही एंटीबायोटिक दवा लें।               हर छोटी बीमारी (जैसे सिरदर्द, जुकाम) में एंटीबायोटिक न लें।

दवा का पूरा कोर्स खत्म करें इसे बीच में न छोड़ें।             जो दवा डॉक्टर ने आपके लिए लिखी है उसे किसी और को न दें।

साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें और इन्फेक्शन से बचें।     डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न खरीदें।

 

इन सरल सावधानियों का पालन करके ही हम आने वाले समय के इस बड़े स्वास्थ्य संकट से बच सकते हैं।

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