UPI ट्रांजैक्शन नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। आज ज्यादातर भुगतान UPI के जरिए हो रहे हैं। इसी डिजिटल लेनदेन को और तेज तथा सुरक्षित बनाने के लिए NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने 3 नवंबर 2025 से UPI सिस्टम में बड़े बदलाव लागू करने का निर्णय लिया है।
अब तक UPI में अधिकारित लेन-देन होंगे, जिनमें विवादित लेन-देन को इन ट्रांजैक्शन में शामिल नहीं किया जाएगा। पहले दोनों तरह के ट्रांजैक्शन एक साथ प्रोसेस होते थे। अब तक यूपीआई में रोजाना 10 सेटलमेंट साइकल RTGS के माध्यम से चलते थे, जिनमें सभी तरह के ट्रांजेक्शन सही (Authorized) और विवादित (Dispute) एक साथ प्रोसेस किए जाते थे। ट्रांजेक्शन की बढ़ती संख्या के कारण इन प्रोसेस में देरी हो रही थी। इसलिए अब NPCI ने दोनों प्रकार के ट्रांजेक्शन को अलग-अलग साइकल में विभाजित करने का निर्णय लिया है।
अब 10 साइकल केवल ऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन के लिए होंगे। इन साइकल की टाइमिंग इस प्रकार रहेगी-पहला साइकल रात 9 बजे से मिडनाइट तक, दूसरा मिडनाइट से सुबह 5 बजे तक, तीसरा 5 से 7 बजे, चौथा 7 से 9 बजे, पांचवां 9 से 11 बजे, छठा 11 से 1 बजे दोपहर, सातवां 1 से 3 बजे, आठवां 3 से 5 बजे, नौवां 5 से 7 बजे शाम और दसवां 7 से 9 बजे रात तक चलेगा। पुरानी RTGS कट-ऑफ या पोस्टिंग टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वहीं, डिस्प्यूट ट्रांजेक्शन यानी विवादित लेन-देन के लिए अब दो अलग साइकल होंगे। पहला “डीसी1” (DC1) मिडनाइट से दोपहर 4 बजे तक और दूसरा “डीसी2” (DC2) दोपहर 4 बजे से मिडनाइट तक रहेगा। इन दोनों साइकल में केवल विवादित ट्रांजेक्शन ही प्रोसेस किए जाएंगे। अन्य सभी नियम जैसे टाइमिंग, रिकंसिलिएशन और जीएसटी रिपोर्ट पहले की तरह ही रहेंगे। नियमित ट्रांजैक्शन अलग प्रोसेस होने से रिफंड जल्द और पारदर्शी तरीके से मिलेगा। बैंकों और फिनटेक सेक्टर को अधिक स्पष्टता मिलेगी और UPI-आधारित क्रेडिट, BNPL व EMI जैसी सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

