भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इस हफ्ते भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में फॉरेक्स रिज़र्व 6.92 अरब डॉलर घटकर 695.35 अरब डॉलर पर आ गया, जबकि इससे पहले यह 702.28 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। कुछ ही दिनों में इतने बड़े अंतर ने आर्थिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
क्यों घटी विदेशी मुद्रा की ताकत?
आरबीआई के अनुसार, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में कमी है। यह हिस्सा भंडार का सबसे बड़ा घटक होता है। रिपोर्ट बताती है कि फॉरेन करेंसी एसेट्स में 3.86 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज हुई, जिससे इनकी कुल वैल्यू घटकर 566.54 अरब डॉलर रह गई। इन परिसंपत्तियों का मूल्य केवल डॉलर से नहीं, बल्कि यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल पर भी निर्भर करता है।
सोने के भंडार में भी झटका लगा — समीक्षाधीन सप्ताह में 3.01 अरब डॉलर की गिरावट के साथ गोल्ड रिज़र्व घटकर 105.536 अरब डॉलर पर आ गया। इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) यानी विशेष आहरण अधिकार भी 5.8 करोड़ डॉलर कम होकर 18.66 अरब डॉलर रह गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि IMF में भारत का आरक्षित भंडार मामूली बढ़त के साथ 4.608 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह गिरावट दो प्रमुख कारणों से हुई —
डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं की कमजोरी के कारण भंडार की वैल्यू पर असर पड़ा।
आरबीआई के बाजार हस्तक्षेप ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई, ताकि रुपये को स्थिर बनाए रखा जा सके।
डाॅलर के मुकाबले रुपए का रेट
विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को भारतीय रुपया 88.69 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ। दिनभर यह हल्की उतार-चढ़ाव के बीच 88.59 के उच्च और 88.78 के निम्न स्तर के बीच कारोबार करता रहा। रुपये पर दबाव की वजह घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती बताई जा रही है।
डॉलर इंडेक्स, शेयर बाजार और क्रूड ऑयल की स्थिति
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को दर्शाता है, 0.04% बढ़कर 99.39 पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में भी कमजोरी रही — सेंसेक्स 465.75 अंक गिरकर 83,938.71, जबकि निफ्टी 155.75 अंक टूटकर 25,722.10 पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों (FII) ने भी 3,077.59 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जिससे बाजार पर और दबाव आया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.68% घटकर 64.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

