रेलवे का बड़ा फैसला: टिकट बुक करते ही अब मिलेगा लोअर बर्थ और सोने का तय समय

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  भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सफर सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए टिकट बुकिंग के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। 2025 से लागू होने वाले इन नए नियमों में लोअर बर्थ आवंटन की नई व्यवस्था, सोने के समय का स्पष्ट निर्धारण और अग्रिम आरक्षण अवधि (एडवांस रिजर्वेशन पीरियड) में कटौती शामिल है। रेलवे का उद्देश्य सफर को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।

लोअर बर्थ का नया नियम
रेलवे ने RailOne ऐप लॉन्च किया है, जो आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा एक ही प्लेटफॉर्म पर देता है। इस ऐप के जरिए लोअर बर्थ की प्राथमिकता अब और स्पष्ट हो गई है। वरिष्ठ नागरिक, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं और गर्भवती महिलाएं पहले से ही लोअर बर्थ के लिए पात्र हैं। अगर बुकिंग के समय लोअर बर्थ उपलब्ध नहीं होती है, तो ट्रेन में टीटीई के पास अधिकार है कि वह सफर के दौरान खाली लोअर बर्थ को ऐसे यात्रियों को आवंटित कर सके।

इसके अलावा, ऑनलाइन बुकिंग में अब “बुक ओनली इफ लोअर बर्थ इज अवेलेबल” का विकल्प भी दिया गया है। इसका मतलब है कि टिकट केवल तभी बुक होगा जब लोअर बर्थ उपलब्ध हो, अन्यथा बुकिंग नहीं होगी। यह सुविधा उन यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी है जो लोअर बर्थ के बिना सफर करना नहीं चाहते।

सोने और बैठने का समय निर्धारित
रिजर्व्ड कोचों में अब सोने और बैठने के नियम साफ कर दिए गए हैं। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सिर्फ अपनी निर्धारित बर्थ पर ही सोने की अनुमति है। दिन के समय सभी यात्रियों को सीट पर बैठने की सुविधा रहेगी। आरएसी टिकट वाले यात्री दिन में साइड लोअर और साइड अपर बर्थ को साझा करेंगे, लेकिन रात के समय केवल टिकटधारक लोअर बर्थ का अधिकार रखेगा।

अग्रिम आरक्षण अवधि में बदलाव
रेलवे ने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड यानी आरक्षण की अवधि में भी बदलाव किया है। पहले 120 दिन पहले टिकट बुक किया जा सकता था, लेकिन अब इसे घटाकर 60 दिन कर दिया गया है। इसका उद्देश्य सिस्टम को सरल बनाना और टिकट कैंसिलेशन की समस्याओं को कम करना है। रेलवे लगातार डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा दे रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि बुकिंग करते समय उपलब्ध विकल्पों का सही तरीके से उपयोग करें ताकि सफर आरामदायक और परेशानी मुक्त रहे।

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